पाकिस्तान की शहबाज़ शरीफ की सरकार की तरफ से पेश वकील ने कोर्ट के सामने तर्क दिया कि कश्मीर (PoK) अपने खुद के संविधान और अदालतों के साथ एक विदेशी क्षेत्र है जहां पाकिस्तानी अदालतों के फैसलों को विदेशी अदालतों के फैसलों के समान माना जाता है।
पाकिस्तान ने आखिरकार मान ही लिया कि PoK यानी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (Pakistan Occupied Kashmir) उसका हिस्सा नहीं है। वो एक विदेशी धरती है। ये कबूलनामा और कहीं नहीं बल्कि पाकिस्तान के घर में वहां की इस्लामाबाद हाईकोर्ट में खुद शहबाज़ सरकार (Shehbaz Sharif) की तरफ से पेश वकील ने किया। कोर्ट में वकील ने बताया कि 2 हफ्ते से पाकिस्तान के लापता शायर अहमद फरहाद शाह जो PoK पुलिस की हिरासत में हैं उन्हें यहां अदालत में नहीं लाया जा सकता। क्योंकि PoK एक विदेशी धरती है जो पाकिस्तान के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती है।
बता दें कि इस्लामाबाद कोर्ट (IHC) की कार्यवाही की शुरुआत में पाकिस्तान के अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल मुनव्वर इकबाल दुग्गल ने कहा कि कवि फरहाद के खिलाफ PoK में मामले दर्ज थे और वो 2 जून तक रिमांड पर हैं। फरहाद का परिवार उनसे मिल चुका है, इसलिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निस्तारण किया जाए। इस पर इस्लामाबाद हाईकोर्ट के जज मोहसिन अख्तर कयानी ने फरहाद की पत्नी अरूज जैनब की दायर याचिका पर कार्यवाही की अध्यक्षता की। दरअसल इस याचिका में कहा गया है कि कवि अहमद फरहाद शाह को जबरन गायब कराया गया है। उन्हें अब किसी भी तरह वापस लाया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो।
इस पर सरकार की तरफ से पेश वकील ने कोर्ट के सामने तर्क दिया कि कश्मीर (PoK) अपने खुद के संविधान और अदालतों के साथ एक विदेशी क्षेत्र है जहां पाकिस्तानी अदालतों के फैसलों को विदेशी अदालतों के फैसलों के समान माना जाता है।
बता दें कि इस पूरे मामले को कोर्ट में खोलते वक्त फरहाद की पत्नी की तरप से पेश वकील ने बताया कि फरहाद का परिवार इस्लामाबाद से धीरकोट पुलिस स्टेशन गया था, लेकिन जब वो वहां पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि आतंकवाद के आरोपों से संबंधित धाराएं शामिल होने के चलते उसे मुजफ्फराबाद (PoK) ट्रांसफर कर दिया गया है। जब कोर्ट के जज ने सवाल किया कि 29 मई को हिरासत में लिए जाने से पहले फरहाद कहां थे, तो वकील ने कहा कि PoK की अदालत इस मामले से निपटेगी। इसके बाद कोर्ट ने शायर अहमद फरहाद की बरामदगी के लिए दायर याचिका के निपटारे के अनुरोध को खारिज कर दिया और अगली सुनवाई की तारीख 7 जून दे दी।