
PM Narendra Modi France Tour: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी फ्रांस और स्लोवाकिया की अपनी छह दिन की यात्रा पर शनिवार को रवाना हो गए। प्रधानमंत्री मोदी का फ्रांस दौरा बेहद अहम है। क्योंकि यहां वह जी-7 देशों की बैठक में भारत समेत ग्लोबल साउथ की आवाज को उठाएंगे। जी-7 देशों की बैठक में 13वीं बार भारत भागीदारी करेगा। वहीं फ्रांस के साथ द्विपक्षीय संबंधों को लेकर भी यह बेहद अहम दौरा होगा। 12 वर्षों में पीएम मोदी का यह सातवां दौरा है। फ्रांस अब भारत का दूसरा सबसे बड़ा हथियारों का आपूर्तिकर्ता देश है। इस दौरे में भारत की 114 राफेल विमानों की खरीद पर मुहर लगने की संभावना है। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पीयूष श्रीवास्तव ने पीएम मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के बीच रक्षा सहयोग पर चर्चा होने की पुष्टि की है। रक्षा सहयोग के अलावा टेक्नोलॉजी, एआई, स्टार्टअप के मुद्दे पर सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत होगी।
रविवार को पीएम मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों की मुलाकात और द्विपक्षीय बातचीत होगी। नीस शहर में आयोजित भारत इनोवेट्स कार्यक्रम का उद्घाटन भी होगा। इसमें दोनों देशों के 120 से अधिक स्टार्टअप, निवेशक और तकनीकी कंपनियां हिस्सा लेंगी। रणनीतिक सहयोग के साथ ही ब्लू इकोनॉमी, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा व डिजिटल इनोवेशन को भी इस दौरे में प्राथमिकता दी जा रही है। दोनों देशों ने 2026 को इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन के रूप में घोषित किया है।
15 जून को दुनिया की सात सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी-7 का शिखर सम्मेलन फ्रांस में होगा। एवियन जो अपने मिनरल वॉटर के लिए प्रसिद्ध है, वहां फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों 52वें जी-7 समिट की अध्यक्षता करेंगे। इस सम्मेलन में पीएम मोदी और अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की मुलाकात और द्विपक्षीय वार्ता हो सकती है। दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। पिछले महीने अमरीकी विदेशमंत्री मार्को रूबियो भी भारत दौरे पर आए थे। अगर दोनों नेताओं की मुलाकात होती है तो ट्रेड डील से लेकर पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर बातचीत हो सकती है।
फ्रांस की यात्रा के बीच में ही प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया जाएंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज के अनुसार 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला दौरा है। यूक्रेन-रूस युद्ध के दौरान भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी में स्लोवाकिया ने अहम सहयोग दिया था।