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पीएम मोदी-नेतन्याहू के बाद भी कायम रहेंगे भारत-इजरायल के रिश्ते? इजरायली रिपोर्ट ने बताई बड़ी चुनौती

द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी और नेतन्याहू के करीबी रिश्तों ने भारत-इजरायल साझेदारी को मजबूती दी है। रिपोर्ट ने दोनों नेताओं के बाद भी रिश्ते कायम रखने पर जोर दिया।
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Updated: 3 Nov 2026, 10:29 PM IST
India Israel relation
पीएम मोदी-बेंजामिन नेतन्याहू(फोटो-IANS)

India Israel Partnership: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच करीबी संबंधों ने भारत और इजरायल की रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती दी है। दोनों नेताओं के बीच आपसी भरोसे और व्यक्तिगत तालमेल ने द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। द टाइम्स ऑफ इजरायल की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और इजरायल के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध 1992 में स्थापित हुए थे। इसके बाद अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में दोनों देशों के बीच सुरक्षा और रक्षा सहयोग जारी रहा। हालांकि, मोदी और नेतन्याहू के नेतृत्व में इस साझेदारी को ज्यादा पहचान मिली और रिश्तों को नए स्तर पर ले जाने की कोशिश हुई।

मोदी-नेतन्याहू के रिश्तों को सिर्फ दोस्ती तक सीमित नहीं मानती रिपोर्ट


रिपोर्ट में दोनों नेताओं के संबंधों को केवल व्यक्तिगत दोस्ती या राजनीतिक दिखावे के तौर पर देखने के बजाय आपसी विश्वास का प्रतीक बताया गया है। इसमें कहा गया है कि मोदी और नेतन्याहू के बीच करीबी संबंधों को अक्सर 'ब्रोमांस' कहा जाता है। उनकी साथ में तस्वीरों और सार्वजनिक मुलाकातों को इस रिश्ते की पहचान माना जाता है।

हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी के पीछे भारत और इजरायल के समाजों के बीच गहरा जुड़ाव और एक-दूसरे के प्रति भरोसा भी है। इसमें कहा गया है कि दोनों देश अपनी लंबी सभ्यतागत विरासत, ऐतिहासिक चुनौतियों और राष्ट्रीय पहचान को लेकर एक-दूसरे से जुड़ाव महसूस करते हैं।

आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियां भी दोनों देशों को करीब लाती हैं


रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और इजरायल दोनों ऐसे क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद बड़ी चुनौतियां हैं। दोनों देशों ने अलग-अलग दौर में गंभीर संकटों का सामना किया है और आधुनिक राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत की है। रिपोर्ट में भारत के यहूदी समुदायों का भी जिक्र किया गया है। इसके मुताबिक, कोच्चि, मुंबई और देश के अन्य हिस्सों में यहूदी समुदाय सदियों से भारतीय समाज का हिस्सा रहे हैं। इसे भारत और इजरायल के बीच साझा ऐतिहासिक जुड़ाव का एक खास पहलू बताया गया है।

रक्षा से लेकर कृषि और साइबर तकनीक तक बढ़ा सहयोग


भारत और इजरायल के बीच सहयोग का दायरा रक्षा और सुरक्षा से आगे बढ़कर कई दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचा है। रिपोर्ट में दोनों देशों के बीच इन क्षेत्रों में सहयोग का जिक्र किया गया है:

  • रक्षा और सैन्य तकनीक
  • कृषि और आधुनिक खेती
  • जल प्रबंधन
  • साइबर सुरक्षा
  • विज्ञान और तकनीकरिपोर्ट का कहना है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी समझौते केवल कारोबारी जरूरतों का नतीजा नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे लंबे समय से विकसित हुआ आपसी भरोसा भी है।

नेतन्याहू के बाद भी रिश्ते बनाए रखना इजरायल के लिए चुनौती


रिपोर्ट में भारत-इजरायल संबंधों के भविष्य को लेकर भी अहम सवाल उठाया गया है। इसके मुताबिक, मोदी और नेतन्याहू के बीच व्यक्तिगत तालमेल ने साझेदारी को गति दी है, लेकिन इसकी असली मजबूती इस बात से तय होगी कि दोनों नेताओं के सत्ता में न रहने के बाद भी रिश्ते कितने मजबूत बने रहते हैं। रिपोर्ट ने कहा कि इजरायल में अगली सरकार के सामने इस भरोसे को बनाए रखने की जिम्मेदारी होगी। उसे भारत के साथ संबंधों को केवल कूटनीतिक औपचारिकता या पिछली सरकार की विरासत के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे राष्ट्रीय हित से जुड़ी दीर्घकालिक साझेदारी के तौर पर आगे बढ़ाना चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक, यदि दोनों देश इस रिश्ते को संस्थागत रूप देते हैं और राजनीतिक बदलावों से अलग रखते हैं, तो मोदी और नेतन्याहू के बीच बना व्यक्तिगत भरोसा दोनों देशों के लोगों के बीच स्थायी संबंध में बदल सकता है।

Updated on:
3 Nov 2026, 10:29 PM IST
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