
पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर - पीओके (Pakistan Occupied Kashmir - PoK) में पिछले कई हफ्तों से नागरिक अधिकारों को लेकर चल रहा आंदोलन तेज़ हो गया है। स्थानीय लोग पाकिस्तानी सरकार, सेना और प्रशासन के खिलाफ सड़कों हैं और अपनी नाराज़गी जाहिर कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें महंगाई, बिजली संकट, खाद्य सामग्री की कमी, इंटरनेट ब्लॉकेज और मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर हैं। रावलकोट, मुज़फ्फराबाद और अन्य इलाकों में हजारों लोग जमा हो रहे हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) को पाकिस्तान सरकार द्वारा आतंकी संगठन घोषित किए जाने के बाद उसके नेता सरदार अमन खान ने वीडियो संदेश जारी कर भारत के लोगों से समर्थन माँगा है। खान ने भारत में जम्मू, कश्मीर, श्रीनगर, पुंछ, राजौरी, लद्दाख, कारगिल और कुछ अन्य जगहों के लोगों से समर्थन की अपील की है। कुछ वीडियो और रिपोर्ट्स में प्रदर्शनकारियों द्वारा भारत की ओर रुख दिखाने और “भारत के साथ जुड़ने” जैसी भावनाएं भी व्यक्त की गई हैं।
खान ने आरोप लगाया कि पीओके में स्थिति बेहद खराब हो चुकी है और पाकिस्तानी सेना आंदोलन दबाने के लिए आटा, अनाज और अन्य ज़रूरी खाने की वस्तुओं की आपूर्ति रोक रही है तथा लोगों पर अमानवीय अत्याचार कर रही है। खान ने यह भी दावा किया कि रावलकोट समेत कई इलाकों के हालात युद्ध क्षेत्र जैसे बन चुके हैं।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई के चलते पीओके में 30 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। इसके साथ ही जेएएसी पर प्रतिबंध लगाकर उसके 150 से ज्यादा सदस्यों को निगरानी सूची में डाल दिया गया है।
प्रदर्शनकारी नेता शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी के बाद जेएएसी ने 5 जुलाई को पूरे पीओके में चक्का जाम का आह्वान किया है। संगठन के प्रमुख नेता खालिद मजीद बांडे ने पाकिस्तानी प्रशासन से आगे किसी भी बातचीत की संभावना खारिज करते हुए कहा कि अब संघर्ष ही एकमात्र रास्ता बचा है। पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर मुश्ताक अहमद ने भी रावलकोट में भारी सैन्य तैनाती, सख्त तलाशी, खाद्यान्न आपूर्ति पर निगरानी और घेराबंदी जैसे हालात होने का दावा किया है।