
दुनिया के आधे से ज़्यादा प्रवासी पक्षियों की आबादी घट रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिर्फ पक्षियों का संकट नहीं, बल्कि पूरी पृथ्वी के पर्यावरण और जैव विविधता के बिगड़ते स्वास्थ्य का संकेत है। हालिया वैश्विक समीक्षा में पाया गया कि दुनिया की 3,380 प्रवासी पक्षी प्रजातियों में से 50% से ज़्यादा की संख्या घट रही है। प्रवासी पक्षी हर साल हज़ारों किलोमीटर की यात्रा करते हैं और बीज फैलाने, पौधों के परागण, कीट नियंत्रण और पोषक तत्वों के वितरण जैसे कई महत्वपूर्ण पारिस्थितिक कार्य करते हैं।
नेचर रिव्यूज़ बायोडायवर्सिटी में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार पक्षियों की गिरती आबादी के पीछे आवास का नष्ट होना, जलवायु परिवर्तन, कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग, अवैध शिकार, इमारतों और बिजली की तारों से टकराव और मछली पकड़ने के जाल जैसी मानवीय गतिविधियों को प्रमुख कारण बताया गया है।
ये पक्षी कई देशों और महाद्वीपों की सीमाएं पार करते हैं, इसलिए इनकी सुरक्षा किसी एक देश के बस की बात नहीं है। इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, प्रवासी मार्गों और प्रमुख आर्द्रभूमियों की रक्षा तथा आधुनिक तकनीकों जैसे जीपीएस ट्रैकिंग, सैटेलाइट और एआइ आधारित निगरानी का उपयोग बढ़ाना होगा।
भारत सेंट्रल एशियन फ्लाईवे का प्रमुख हिस्सा है। यह प्रवासी पक्षियों का एक अंतर्राष्ट्रीय प्रवास मार्ग है, जिससे हर साल करोड़ों पक्षी मध्य एशिया, साइबेरिया और आर्कटिक क्षेत्रों से भारत सहित दक्षिण एशिया तक आते-जाते हैं। भारत में 1,300 से ज़्यादा पक्षी प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं, जिनमें बड़ी संख्या प्रवासी पक्षियों की है। प्रवासी पक्षियों की घटती संख्या भारत के लिए भी चिंता का विषय है।
आवास के अनुसार गिरावट पर गौर किया जाए, तो वनों में रहने वाली 70% से ज़्यादा प्रजातियों में गिरावट देखने को मिल रही है। वहीँ समुद्री पक्षियों में 55% गिरावट हो रही है। पक्षी समूहों में गिरावट पर गौर किया जाए, तो 90% से ज़्यादा रंग-बिरंगे पक्षियों में गिरावट देखने को मिली है। तोते, कठफोड़वा, कोयल, कबूतर जैसे पक्षियों में 70% गिरावट दर्ज हुई है। वहीँ तटवर्ती पक्षियों में 47% गिरावट देखने को मिली है। यह चिंता का विषय है।