LNG Supply Shortage In Pakistan: पाकिस्तान गंभीर ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रहा है। LNG आपूर्ति बाधित होने से बिजली की भारी कमी, लंबे कटौती घंटे और उद्योगों पर असर दिख रहा है। मध्य पूर्व तनाव और महंगी गैस के बीच देश आर्थिक दबाव और ऊर्जा चुनौतियों से जूझ रहा है।
Power Crisis In Pakistan: पाकिस्तान इन दिनों एक गहरे ऊर्जा संकट की ओर बढ़ता दिख रहा है। हालात ऐसे हैं कि आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में लंबे समय तक बिजली कटौती आम बात हो सकती है। वजह सिर्फ घरेलू नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय भी है। खासतौर पर मध्य पूर्व में चल रहे तनाव का सीधा असर अब पाकिस्तान की बिजली व्यवस्था पर पड़ रहा है।
ताजे आंकड़े हालात की गंभीरता साफ दिखाते हैं। शाम के समय, जब बिजली की मांग सबसे ज्यादा होती है, तब करीब 4,500 मेगावाट की कमी दर्ज की गई है। यह कुल जरूरत का लगभग चौथाई हिस्सा है। इसका असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखने लगा है। कई शहरों में घंटों की लोडशेडिंग हो रही है, जिस कारण 8 से 10 घंटे बिजली गायब रह रही है, जबकि ग्रामीण इलाकों में तो हाल और भी खराब हैं। कहीं-कहीं 12 से 14 घंटे तक बिजली गायब रहती है। इंडस्ट्री भी इससे अछूते नहीं हैं। कारोबारी संगठनों का कहना है कि फैक्ट्रियों में रोजाना कई घंटों तक काम रुक रहा है, जिससे उत्पादन और निर्यात दोनों पर असर पड़ना तय है।
इस संकट की जड़ें देश के बाहर हैं। पहली बड़ी वजह है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का प्रभावित होना। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से तेल और गैस की बड़ी मात्रा गुजरती है। इस रास्ते में बाधा आने से सप्लाई चेन पर असर पड़ा है। दूसरी और ज्यादा सीधी मार कतर से आने वाली LNG पर पड़ी है। पाकिस्तान अपनी बिजली जरूरतों के लिए काफी हद तक इसी गैस पर निर्भर है। लेकिन हाल ही में कतर के बड़े गैस प्लांट पर हुए हमलों के बाद वहां से सप्लाई लगभग रुक गई है।
अब पाकिस्तान के पास विकल्प बहुत सीमित हैं। वह खुले बाजार से LNG खरीद सकता है, लेकिन यह सौदा सस्ता नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें पहले से ही ऊंची हैं। ऐसे में पाकिस्तान की कमजोर आर्थिक स्थिति उसे ज्यादा खर्च करने की इजाजत नहीं देती। यही वजह है कि सरकार फिलहाल कीमतों के थोड़ा नीचे आने का इंतजार कर रही है।
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ देश अंदरूनी संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी सक्रिय है। पाकिस्तान, ईरान और अमेरिका के बीच संभावित बातचीत की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। इस बीच उसकी अपनी आर्थिक हालत भी कुछ खास मजबूत नहीं है। विदेशी मुद्रा भंडार दबाव में हैं। हालांकि हाल ही में सऊदी अरब से मिली 3 अरब डॉलर की मदद ने थोड़ी राहत जरूर दी है। माना जा रहा है कि इस रकम का इस्तेमाल पुराने कर्ज चुकाने में किया जाएगा।
पाकिस्तान के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक तरफ बिजली की कमी से निपटना और दूसरी तरफ आर्थिक संतुलन बनाए रखना। अगर जल्द ही गैस सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले महीनों में हालात और कठिन हो सकते हैं। इसका असर सिर्फ आम लोगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।