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अब तक आक्रामक रहे पुतिन ने क्यों दिया यूक्रेन से बिना शर्त सीधे वार्ता का बड़ा प्रस्ताव

Putin Ukraine direct talks: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के साथ बिना शर्त सीधी वार्ता करने का प्रस्ताव दिया है।

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May 11, 2025
Putin Ukraine direct talks

Putin Ukraine direct talks: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin)ने ऐलान किया है कि रूस यूक्रेन के साथ बिना किसी शर्त के सीधी शांति वार्ता के लिए तैयार (Putin Ukraine direct talks) है। यह वार्ता 15 मई को इस्तांबुल में (Istanbul peace negotiations) आयोजित की जा सकती है,जहां पहले भी दोनों देशों की बातचीत (Russia-Ukraine peace proposal) हो चुकी है। ध्यान रहे कि यह पहल ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका और यूरोपीय देश युद्ध विराम (Ukraine ceasefire) के लिए रूस पर दबाव बना रहे हैं। पुतिन ने एक देर रात के टेलीविज़न संबोधन में कहा कि वार्ता का उद्देश्य "संघर्ष के मूल कारणों को समाप्त करना" और "दीर्घकालिक शांति की स्थापना करना" है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और यूरोपीय देशों ने युद्ध विराम के लिए दबाव (Russia unconditional talks) तेज कर दिया है। जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और पोलैंड के नेताओं ने कीव में यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के साथ खड़े होकर पुतिन से 30-दिन का युद्ध विराम करने की मांग की है।

स्थायी शांति की दिशा में पहला कदम

पुतिन ने कहा कि यह बातचीत "एक स्थायी शांति की दिशा में पहला कदम" होगी, ना कि यूक्रेन की सेनाओं को फिर से मजबूत करने और नए मोर्चे बनाने की तैयारी। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चेतावनी दी है कि यदि युद्धविराम का उल्लंघन हुआ तो अमेरिका और उसके सहयोगी कड़े प्रतिबंध लगाएंगे।

युद्ध शुरू होने से अब तक रूस और यूक्रेन में कोई प्रत्यक्ष वार्ता नहीं हुई

पुतिन ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान से भी संपर्क करने की बात कही है ताकि वार्ता की रूपरेखा तय की जा सके। सीएनएन के अनुसार, 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक रूस और यूक्रेन के बीच कोई प्रत्यक्ष वार्ता नहीं हुई है।

रूस और यूक्रेन में क्यों शुरू हुई थी जंग (Russia-Ukraine conflict)

रूस और यूक्रेन के बीच 2022 में जो युद्ध शुरू हुआ, उसकी जड़ें राजनीतिक, भौगोलिक और सैन्य तनावों में थीं, जो कई वर्षों से धीरे-धीरे बढ़ रहे थे। रूस का कहना है कि पश्चिमी देशों ने नाटो का विस्तार पूर्व की ओर किया, जिससे उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ। यूक्रेन अगर नाटो में शामिल हो जाता, तो रूस के दरवाजे पर पश्चिमी सैन्य ठिकाने बन सकते थे। यह बात रूस को मंज़ूर नहीं थी। इसके अलावा रूस ने 2014 में क्रीमिया पर कब्ज़ा कर लिया, जो यूक्रेन का हिस्सा था। इसके बाद से यूक्रेन और रूस के संबंध लगातार बिगड़ते गए।

रूस चाहता था कि यूक्रेन कभी नाटो का सदस्य नहीं बनेगा

जब डोनबास क्षेत्र (पूर्वी यूक्रेन) में रूसी समर्थित विद्रोह शुरू हो गया था। रूस चाहता था कि अमेरिका और नाटो यह लिखित रूप से आश्वासन दें कि यूक्रेन कभी नाटो का सदस्य नहीं बनेगा। जब पश्चिमी देश यह गारंटी देने से पीछे हटे, तो रूस ने इसे सीधा खतरा मानते हुए सैन्य कार्रवाई शुरू की। एक और बात, यूक्रेन ने 2014 के बाद से यूरोपीय यूनियन और अमेरिका के साथ नज़दीकी बढ़ाई। रूस इसे अपने प्रभाव क्षेत्र से यूक्रेन के निकलने के रूप में देख रहा था।

तब पुतिन ने कारण बताया था, जातिवाद खत्म करना

पुतिन ने कहा था कि यूक्रेन में कथित “नाज़ी विचारधारा” को खत्म करना और उसकी सेना को कमजोर करना ज़रूरी है। यह दावा राजनीतिक प्रचार माना गया, लेकिन यही उनके आक्रमण का सार्वजनिक तर्क बना। इसके बाद 24 फरवरी 2022 को रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर सैन्य हमला शुरू किया। इसे रूस ने "विशेष सैन्य अभियान" कहा, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इसे आक्रमण (Invasion) माना। बहरहाल रूस-यूक्रेन युद्ध का कारण केवल एक मुद्दा नहीं, बल्कि सुरक्षा चिंताओं, भू-राजनीतिक तनाव, ऐतिहासिक विवादों और शक्ति संघर्ष का मिला-जुला परिणाम है।

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