
अमेरिका (United States of America) और तुर्की (Turkey) के बीच अच्छे संबंध हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdoğan) को दोस्त माना जाता है। एर्दोगन के बुलाने पर ट्रंप जुलाई में तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो समिट (NATO Summit) में शामिल हुए थे और इस दौरान उन्होंने तुर्की को अमेरिकी फाइटर जेट F-35 फाइटर जेट्स बेचने पर सहमति भी जताई थी। अब अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों पर तुर्की के राष्ट्रपति ने प्रतिक्रिया जाहिर की है।
मिडिल ईस्ट में जल्द शांति स्थापित होने की उम्मीद जताते हुए एर्दोगन ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “हम चाहते हैं कि मिडिल ईस्ट में शांति आए। हमारी सबसे बड़ी उम्मीद यह है कि चुनाव के नतीजे हमारे क्षेत्र में लंबे समय तक शांति और स्थिरता लाने में मदद करें। हम इस लक्ष्य के साथ अमेरिकी एडमिनिस्ट्रेशन के साथ ही हाउस ऑफ रिप्रेज़ेटेटिव्स और सीनेट दोनों के साथ करीबी बातचीत जारी रखेंगे।”
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों का तुर्की-अमेरिका संबंधों पर क्या असर पड़ेगा, इस बारे में बात करते हुए एर्दोगन ने कहा कि चुनावी नतीजों का दोनों देशों के संबंधों पर पड़ने वाले असर को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी।
तुर्की भले ही अमेरिका के साथी इज़रायल का विरोधी है, लेकिन वो अमेरिका का सहयोगी है। खुद ट्रंप भी ऐसा ही मानते हैं और कई मौकों पर वह एर्दोगन की तारी करते हुए उन्हें दोस्त भी बता चुके हैं। हालांकि जब तुर्की ने रूस (Russia) से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था, तब दोनों देशों के संबंधों में दरार आई थी और अमेरिका ने तुर्की पर प्रतिबंध भी लगाए थे, जिससे दोनों के संबंधों में तनाव आ गया था। हालांकि अब तुर्की और अमेरिका के बीच संबंध अच्छे हो चुके हैं और तनाव पूरी तरह से दूर हो चुका है। ट्रंप और एर्दोगन के बीच दोस्ती की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति के पहले कार्यकाल में हुई हो गई थी। इस साल ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में यह दोस्ती और मजबूत हुई। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका के साथ ही तुर्की भी नाटो का सदस्य देश है।