तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट का संघर्ष अब यूरोप तक पहुंच रहा है और अगर शांति की कोशिशें नहीं हुईं तो हालात और बिगड़ सकते हैं। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है।
यूरोप एक बार फिर मिडिल ईस्ट के तनाव की चपेट में आता दिख रहा है। तुर्की के राष्ट्रपति ने साफ चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा संघर्ष को नहीं रोका गया, तो इसका असर सिर्फ एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यूरोप की शांति भी भंग कर सकता है।
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन ने जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वाल्टर स्टीनमीयर से बातचीत में कहा कि मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष अब यूरोप तक असर डाल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इसे कूटनीति और शांति के रास्ते से नहीं सुलझाया गया, तो आने वाले समय में नुकसान और ज्यादा गंभीर हो सकता है।
एर्दोगन ने कहा कि क्षेत्र में चल रहा संघर्ष अब सीमित नहीं रहा है। इसका असर धीरे-धीरे यूरोप तक पहुंच रहा है और वहां की आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता को भी प्रभावित कर सकता है। उनके मुताबिक, अगर हालात ऐसे ही रहे तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशें भी चल रही हैं। बताया जा रहा है कि अगले 36 से 72 घंटे के भीतर बातचीत फिर से शुरू हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वार्ता शुक्रवार तक शुरू हो सकती है, हालांकि अभी कोई पक्की पुष्टि नहीं है।
हालांकि बातचीत की संभावना बनी हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी साफ दिख रही है। ईरान का कहना है कि पिछली बातचीत में अमेरिका ने गंभीरता नहीं दिखाई, जबकि अमेरिका का दावा है कि वह शांति चाहता है लेकिन शर्तों के साथ।
ईरान ने साफ कर दिया है कि किसी भी बातचीत से पहले समुद्री नाकाबंदी खत्म होनी चाहिए। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर गालिबफ ने कहा कि जब तक आर्थिक दबाव और सैन्य गतिविधियां बंद नहीं होतीं, तब तक कोई ठोस प्रगति मुश्किल है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी कहा है कि अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि ईरान नए दौर की बातचीत में शामिल होगा या नहीं। इस पूरे मामले ने वैश्विक कूटनीति को एक नाजुक मोड़ पर ला दिया है, जहां हर बयान हालात को और जटिल बना रहा है।
इस पूरे तनाव के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर चर्चा में है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है और यहां किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।