23 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

150 डॉलर तक जा सकता था तेल, संकट नजर आते ही ट्रंप ने रूस को दी बड़ी छूट तो मचा बवाल, अब देनी पड़ी सफाई

अमेरिका ने रूस के तेल पर प्रतिबंधों में अस्थायी राहत देकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार का दावा है कि इससे दुनिया में तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखा गया, जबकि विपक्ष इसे रूस को फायदा पहुंचाने वाला फैसला बता रहा है।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Mukul Kumar

Apr 23, 2026

Vladimir Putin and Donald Trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन। (फोटो- The Washington Post)

हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया भर में तेल का संकट गहराता जा रहा है। वहीं, तेल की कीमतें भी वैश्विक राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन गई हैं।

बढ़ती महंगाई के बीच अमेरिका के एक फैसले ने नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ ट्रंप सरकार दावा कर रही है कि उसने आम लोगों को राहत दी, वहीं विपक्ष इसे रूस को फायदा पहुंचाने वाला कदम बताया है।

महंगाई रोकने के लिए लिया गया फैसला

अमेरिका में भारी बवाल के बाद अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने रूस के तेल पर दी गई अस्थायी छूट का बचाव किया है। उनका कहना है कि यह कदम अचानक बढ़ती कीमतों को काबू में रखने के लिए जरूरी था।

उन्होंने बताया कि बाजार में अनिश्चितता थी और सप्लाई टूटने का खतरा था। ऐसे में यह फैसला लिया गया ताकि तेल की उपलब्धता बनी रहे और कीमतें बेकाबू न हों।

'150 डॉलर तक जा सकता था तेल'

बेसेंट ने कहा कि अगर यह छूट नहीं दी जाती, तो हालात काफी खराब हो सकते थे। उनके मुताबिक, तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती थी।

उन्होंने यह भी बताया कि इस फैसले से करीब 25 करोड़ बैरल तेल बाजार में बना रहा, जिससे सप्लाई स्थिर रही और कीमतों में बड़ा उछाल नहीं आया।

विपक्ष का हमला- रूस को मिल रहा फायदा

इस फैसले पर अमेरिका की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। डेमोक्रेट नेता क्रिस कून्स ने कहा कि इस छूट से रूस को अरबों डॉलर की कमाई हो सकती है। उनका कहना है कि इससे रूस पर बनाया गया दबाव कमजोर पड़ सकता है, जो मौजूदा हालात में बेहद जरूरी है।

आम जनता अब भी परेशान

विपक्ष का कहना है कि सरकार के दावों के बावजूद आम लोगों को राहत नहीं मिली है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें अभी भी करीब 4 डॉलर प्रति गैलन बनी हुई हैं। जैक रिड ने भी कहा कि यह कीमतें आम परिवारों के बजट पर भारी पड़ रही हैं और लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।

गरीब देशों की मांग पर बढ़ी छूट

ट्रंप सरकार का पक्ष यह भी है कि यह फैसला सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के कई गरीब और विकासशील देशों को ध्यान में रखकर लिया गया।

बताया गया कि 10 से ज्यादा देशों ने तेल की सप्लाई बनाए रखने के लिए इस छूट को बढ़ाने की मांग की थी। इसी वजह से इसे सीमित समय के लिए आगे बढ़ाया गया।

आगे क्या होगा तेल बाजार का हाल?

बेसेंट ने उम्मीद जताई है कि आने वाले समय में हालात बेहतर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि बाजार में ऐसे संकेत मिल रहे हैं, जिससे आगे कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन जैसे तनाव जारी रहे तो कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।

संतुलन की मुश्किल चुनौती

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों की कोशिश रही है कि रूस की कमाई कम की जाए, लेकिन तेल की सप्लाई पर ज्यादा असर न पड़े। यही संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती है। अमेरिका का यह फैसला इसी संतुलन को बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

बता दें कि अमेरिका ने रूस को तेल के मामले में कोई सीधी छूट नहीं दी है, बल्कि रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में एक अस्थायी ढील दी गई है।

वैश्विक बाजार में तेल की कमी और कीमतों में तेज बढ़ोतरी रोकने के लिए कुछ स्तर पर रूसी तेल की सीमित बिक्री और सप्लाई जारी रहने दी गई है।