
अमेरिका (United States of America) में वैज्ञानिकों ने जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की मदद से शुरुआती ब्रह्मांड में एक अनोखे रहस्यमयी 'ब्लैक होल स्टार' (Black Hole Star) की खोज की है। इसे एमओएम-बीएच-1 नाम दिया है। यह तब का हो सकता है जब ब्रह्मांड की उम्र करीब 66 करोड़ साल थी। यह सामान्य तारे की तरह नहीं है। सबसे हैरान करने वाली बात इसकी बहुत ज़्यादा चमक और असामान्य लाल रंग है। उसके चारों ओर बहुत घनी हाइड्रोजन गैस का आवरण है। इसी वजह से इसे ब्लैक होल स्टार कहा गया है। इस खोज का नेतृत्व भारतीय मूल के खगोल विज्ञानी रोहन नायडू (Rohan Naidu) ने किया है।
रोहन पी. नायडू हैदराबाद में पले-बढ़े है। उन्होंने 18 साल की उम्र में ही इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ दी थी। इसके बाद उन्होंने अपने करियर की दिशा बदली और सिंगापुर के येल-एनयूएस कॉलेज में पढ़ाई शुरू की। वहीं उनका झुकाव खगोल विज्ञान की ओर बढ़ा। बाद में उन्होंने खगोल विज्ञान में रिसर्च की और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी की। उनकी रिसर्च शुरुआती ब्रह्मांड और ब्लैक होल को समझने पर केंद्रित रही। अब वह अमेरिका की मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में पप्पालार्डो फेलो के तौर पर काम कर रहे है।
रोहन और उनके सहयोगी शुरुआती ब्रह्मांड की आकाशगंगाओं की स्टडी करने वाले 'मिराज या मिरेकल' (एमओएम) कार्यक्रम के तहत जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से डेटा जुटा रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक बेहद लाल और चमकीली चीज़ दिखाई दी। इसके प्रकाश की विस्तार से स्टडी करने पर इसके अंदर कई ऐसी विशेषताएं मिलीं जो सामान्य तारों या आकाशगंगाओं से मेल नहीं खाती थीं। इस खगोलीय चीज़ की रोशनी इतनी ज़्यादा थी कि वैज्ञानिकों को इसके अंदर या आसपास मौजूद बहुत तेजी से बढ़ रहे ब्लैक होल की संभावना नज़र आई। इसी तरह उन्होंने ब्लैक होल स्टार की खोज की। रोहन ने इस रिसर्च को लीड किया। उनकी यह स्टडी तारों और ब्लैक होल के व्यवहार के बारे में पारंपरिक विचारों को सीधे तौर पर चुनौती दे रही है जिससे अंतरिक्ष, तारों और ब्लैक होल के बारे में कई नई बातें पता चल सकती हैं।