
रूस में तेल को लेकर हाहाकार मच गया है। यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रिफाइनरी प्लांट्स को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसकी वजह से घरेलू बाजार में डीजल और पेट्रोल की कमी महसूस हो रही है।
इस बीच, रूस के डिप्टी प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा है कि सरकार घरेलू बाजार को स्थिर करने के लिए डीजल निर्यात पर पूरी तरह रोक लगाने और जरूरत पड़ने पर विदेश से ईंधन आयात करने पर विचार कर रही है।
रूस के लिए यह कदम काफी अहम है क्योंकि देश पहले से ही पेट्रोल और जेट फ्यूल के निर्यात पर पाबंदी लगा चुका है। अब डीजल पर भी सख्ती की बात हो रही है, ताकि आम लोगों और ट्रांसपोर्ट को परेशानी न हो।
रूस की कई बड़ी रिफाइनरी पर यूक्रेन के हमले लगातार हो रहे हैं। इससे प्रोडक्शन घट गया है। गैसोलीन का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब 25 प्रतिशत कम हो गया है। इससे घरेलू स्टॉक पर दबाव बढ़ा है। कुछ इलाकों खासकर क्रिमिया में पब्लिक सर्विस पर पाबंदियां लगानी पड़ी हैं।
डिप्टी पीएम ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक में बताया कि रिफाइनरी को पूरी क्षमता से चलाया जा रहा है। मरम्मत का समय भी कम कर दिया गया है और कुछ मेंटेनेंस को आगे बढ़ा दिया गया। फिर भी मांग बढ़ने से दिक्कत हुई है।
उन्होंने कहा कि पैनिक खरीदारी की वजह से डिमांड 20-30 प्रतिशत तक बढ़ गई है। सरकार अब डीजल निर्यात पर शॉर्ट टर्म बैन लगाने की सोच रही है।
यह रोक कुछ महीनों तक रह सकती है। अभी केवल प्रोड्यूसर्स को ही डीजल निर्यात करने की इजाजत है, लेकिन नया बैन सभी पर लागू हो सकता है।
वेदोमोस्ती अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, नोवाक की बैठक में ईंधन आयात का भी विकल्प रखा गया। चीन, साउथ कोरिया जैसे देशों से गैसोलीन आयात करने और इंपोर्ट ड्यूटी माफ करने पर चर्चा हो रही है। कीमतों को कंट्रोल करने के लिए सब्सिडी भी दी जा सकती है।
नोवाक ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है लेकिन सतर्क रहना जरूरी है। घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक है, खासकर डीजल का सरप्लस है, लेकिन सुरक्षा के लिए ये कदम उठाए जा रहे हैं।