
रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) को 54 महीने पूरे हो चुके हैं और अभी भी इसके खत्म होने की उम्मीद नज़र नहीं आ रही है। दोनों देश एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं, जिसकी वजह से दोनों को ही नुकसान हो रहा है। यूक्रेन में तो युद्ध की वजह से भारी तबाही मच चुकी है, लेकिन अब यूक्रेनी सेना रूस में ऊर्जा संयंत्रों पर हमले करते हुए रूस को नुकसान पहुंचा रही है। इसी बीच एक बार फिर यूक्रेन में नाटो (NATO) की सेना की संभावित मौजूदगी की बात पर रूस की तरफ से प्रतिक्रिया सामने आई है।
क्रेमलिन (Kremlin) के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव (Dmitry Peskov) ने मंगलवार, 25 अगस्त को कहा कि रूस यूक्रेन में नाटो की सैन्य टुकड़ियों की मौजूदगी को स्वीकार नहीं करता है। उन्होंने कहा, "हमने कई स्तरों पर बार-बार अपना रुख स्पष्ट किया है कि यूक्रेन में नाटो सदस्य देशों की विदेशी सैन्य टुकड़ियों की तैनाती हमारे लिए स्वीकार्य नहीं है।"
पेस्कोव ने आगे कहा, "रूस को अपनी जीत का भरोसा है और शांतिपूर्ण समाधान के लिए ज़रूरी हालात न होने के कारण सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। मैं आपको यकीन दिला सकता हूं कि हम सिर्फ उम्मीद नहीं कर रहे हैं, बल्कि हमें पूरा भरोसा है कि हमें जीत ज़रूर मिलेगी।"
यह पहला मौका नहीं है जब रूस ने खुले तौर पर यूक्रेन में नाटो की सेना की तैनाती पर विरोध जताया है। रूस शुरू से ही ही इसके खिलाफ है। रूस ने हमेशा ही अपना रुख साफ रखा है कि यूक्रेन बॉर्डर पर नाटो के सैनिकों की मौजूदगी रूस के लिए सही नहीं है और इस वजह से किसी भी कीमत पर ऐसा नहीं होने दिया जा सकता। वहीँ रूस से रक्षा के लिए यूक्रेन काफी समय से नाटो में शामिल होना चाहता था।
अगर यूक्रेन को नाटो की सदस्यता मिलती है, तो नाटो देशों के सैनिक यूक्रेन की बॉर्डर पर तैनात किए जाएंगे। रूस इसे अपने लिए खतरा मानता है और इसी वजह से रूस शुरू से ही यूक्रेन के नाटो का सदस्य बनने के खिलाफ है।