
Saudi Arabia-Houthi Conflict: सऊदी अरब ने यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा अपनी नागरिक जगहों और रणनीतिक समुद्री रास्तों को निशाना बनाए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और खासकर इसके स्थायी सदस्यों से अपनी जिम्मेदारी निभाने की अपील की है। रियाद ने कहा है कि हूती विद्रोही न सिर्फ यमन या खाड़ी क्षेत्र के लिए, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए भी एक गंभीर खतरा हैं।
सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू करने का आह्वान किया। सऊदी अरब ने मांग की कि यमन की वैध सरकार और 'प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल' (PLC) को पूरा राजनीतिक और सैन्य समर्थन दिया जाए, ताकि हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए तख्तापलट को पलटा जा सके और सभी सरकारी संस्थानों पर सरकार का नियंत्रण बहाल किया जा सके।
मंत्रालय ने सऊदी अरब के रिहायशी और आर्थिक बुनियादी ढांचे पर हूती विद्रोहियों द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों की कड़ी निंदा की। बयान में कहा गया है कि हूती लड़ाके बार-बार दुनिया के सबसे पवित्र स्थलों मक्का और मदीना के साथ-साथ राजधानी रियाद और आभा, खमीस मुशैत, जाज़ान, नज्रान, ताइफ़ और यानबू जैसे प्रमुख शहरों को निशाना बना रहे हैं। इसके अलावा, दक्षिणी लाल सागर और रणनीतिक बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य में सऊदी व्यावसायिक जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की गंभीर समुद्री अपराध के रूप में निंदा की गई।
सऊदी अरब ने स्पष्ट किया कि यमन की वैध सरकार के खिलाफ 2014 के तख्तापलट के बाद से ही रियाद ने यमनी संकट के शांतिपूर्ण और कूटनीतिक समाधान के लिए लगातार प्रयास किए हैं। हालांकि, शांति की सभी अपीलों को नजरअंदाज करते हुए हूती विद्रोहियों ने सैन्य तनाव बढ़ाने का रास्ता चुना है। सऊदी अरब के अनुसार, हूती बाहरी ताकतों के एजेंडे को पूरा करने के लिए यमनी लोगों को आर्थिक संकट में धकेल रहा है।
अपने बयान में सऊदी अरब ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह अपनी संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, प्राकृतिक संसाधनों और नागरिकों व वहां रहने वाले विदेशी प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। अंतर्राष्ट्रीय कानून के प्रावधानों का हवाला देते हुए सऊदी अरब ने कहा कि अपनी सुरक्षा के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाना उसका अधिकार है और वह किसी भी खतरे का जवाब देने में पीछे नहीं हटेगा।