
Sudden Danger Alert Shakes Riyadh and Al-Kharj : सऊदी अरब की राजधानी रियाद में शनिवार तड़के अचानक मोबाइल फोन पर खतरे की चेतावनी पहुंची तो लोगों में हलचल बढ़ गई। रियाद के साथ अल-खर्ज में भी संभावित खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया गया, हालांकि कुछ ही समय बाद सिविल डिफेंस ने खतरा टलने की जानकारी दे दी। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब यमन के हूती लड़ाकों और सऊदी अरब के बीच हमले तेज हुए हैं और ड्रोन-मिसाइल गतिविधियों ने सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी सिविल डिफेंस ने शनिवार तड़के राजधानी रियाद और राजधानी के पूर्व में स्थित अल-खर्ज में संभावित खतरे की चेतावनी जारी की। बाद में दोनों क्षेत्रों के लिए खतरा टलने का संदेश जारी कर दिया गया। रॉयटर्स के एक पत्रकार ने रियाद के ओलाया इलाके में दो धमाकों की आवाज सुनने की बात कही। हालांकि, अधिकारियों ने अलर्ट के पीछे मौजूद खतरे की प्रकृति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की।
यह चेतावनी यमन के हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी के बयान के कुछ घंटे बाद आई। सरी ने दावा किया था कि सना में सऊदी अरब से जुड़े कथित प्रयासों को नाकाम किया गया है और इसके जवाब की चेतावनी दी थी। हूती संगठन यमन की राजधानी सना समेत देश के बड़े उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों पर नियंत्रण रखता है।
सऊदी अरब में यह कोई अकेला अलर्ट नहीं है। इससे पहले जेद्दा, ताइफ, खमिस मुशैत और अल-उला समेत कई इलाकों में भी संभावित खतरे की चेतावनियां जारी की गई थीं। शुक्रवार रात सात क्षेत्रों में अलर्ट जारी होने के बाद बाद में सिविल डिफेंस ने खतरा टलने की घोषणा की थी।
तनाव की गंभीरता का अंदाजा हाल की घटनाओं से भी लगाया जा सकता है। ताइफ में सऊदी एयर डिफेंस द्वारा रोके गए हूती ड्रोन का मलबा गिरने से एक यमनी नागरिक की मौत हुई थी, जबकि एक सऊदी महिला और एक पाकिस्तानी नागरिक घायल हुए थे।
हूती हमलों का असर केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है। लाल सागर में समुद्री यातायात और सऊदी ऊर्जा ढांचे को लेकर भी चिंता बढ़ी है। इसी बीच यमन में संघर्ष के कारण कम से कम 1.12 लाख लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं और करीब 3,000 लोग समुद्र के रास्ते जिबूती पहुंचे हैं।
सबसे बड़ी चिंता बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर है। लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला यह मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में सऊदी अरब के आसपास बढ़ता सैन्य तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और तेल बाजारों पर भी असर डाल सकता है।