
Houthis Red Sea blockade: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी (naval blockade) की घोषणा के बाद ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। इस बीच, सऊदी अरब के कच्चे तेल को लेकर भारत और चीन जा रहे दो बड़े तेल टैंकरों ने हूती विद्रोहियों से चेतावनी मिलने के बाद अपना रास्ता बदल लिया है। दोनों टैंकरों ने खुले समुद्र में यू-टर्न लिया और स्वेज नहर की ओर मुड़ गए।
हूती विद्रोहियों ने एक ईमेल के जरिए कमर्शियल जहाजों और इंटरनेशनल शिपिंग कंपनियों को चेतावनी जारी की। संगठन ने कंपनियों को निर्देश दिया कि वे सऊदी अरब के किसी भी बंदरगाह पर न तो सामान लोड करें और न ही वहां सामान उतारें।
हूती विद्रोहियों ने चेतावनी दी कि जो भी जहाज इस आदेश का उल्लंघन करेगा या सऊदी बंदरगाहों के साथ व्यापारिक गतिविधियां जारी रखेगा, उसे समुद्र में कहीं भी निशाना बनाया जा सकता है। इस अल्टीमेटम से लाल सागर (Red Sea) में गश्त करने वाले या वहां से गुजरने वाले जहाजों में तुरंत डर फैल गया, जिससे सऊदी कच्चे तेल को ले जा रहे जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा।
हूती विद्रोही उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं। इसमें बाब अल-मंदेब स्ट्रेट का तटीय इलाका भी शामिल है, जो लाल सागर के मुहाने पर स्थित एक बेहद अहम रणनीतिक जलमार्ग है। समुद्री व्यापार के नजरिए से बाब अल-मंदेब एशिया और यूरोप को जोड़ने वाला सबसे छोटा और सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है।
इस संकरे समुद्री रास्ते पर हूतियों की मजबूत पकड़ के कारण लाल सागर से गुजरने वाले किसी भी जहाज को खतरे में डालना उनके लिए काफी आसान हो जाता है, जिसका असर ग्लोबल सप्लाई चेन पर पहले भी देखा जा चुका है।
ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में गतिरोध के बाद, सऊदी अरब मध्य पूर्व से लाखों बैरल कच्चे तेल के निर्यात के लिए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर रहा था। इसके लिए सऊदी अरब लाल सागर तट पर स्थित अपने प्रमुख बंदरगाह यानबू पर निर्भर था।
होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से बचने के लिए यानबू बंदरगाह के जरिए लाल सागर से होते हुए एशियाई देशों (मुख्य रूप से भारत और चीन) को रोजाना लाखों बैरल तेल भेजा जा रहा था। हालांकि, लाल सागर में समुद्री नाकेबंदी की हूतियों की घोषणा ने अब इस वैकल्पिक रास्ते को पूरी तरह से असुरक्षित बना दिया है।