
Sheikh Hasina Bangladesh: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में निर्वासित जीवन जी रही हैं। अगस्त महीने की 5 तारीख को उन्होंने वर्चुअल तरीके से पत्रकारों को संबोधित किया। शेख हसीना के इस कदम पर बांग्लादेश की सरकार ने भारत सरकार के सामने सख्त एतराज जताया था। साथ ही, हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की थी। साथ ही, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा टाल दी गई। इन सब घटनाक्रम के बीच शेख हसीना ने हिंदुस्तान टाइम्स को इंटरव्यू दिया है और बांग्लादेश की हालात पर अपनी राय रखी है।
शेख हसीना ने 5 अगस्त के वर्चुअल संबोधन को लेक कहा कि मैंने एक अंतरराष्ट्रीय मंच से प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इससे किन्हीं दो देशों के संबंध खटाई में कैसे पड़ सकते हैं। तारिक रहमान ने साल 2009 में बांग्लादेश छोड़कर ब्रिटेन जाते समय स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर किया था और कहा था कि वह राजनीति नहीं करेंगे, लेकिन वह अपनी मां (पूर्व पीएम खालिदा जिया) को आगे रखकर राजनीति कर रहे थे, लेकिन मैंने कभी भी ब्रिटेन की सरकार से नहीं कहा कि वह उन्हें ऐसी किसी भी बैठक करने से रोके।
हसीना ने आगे कहा कि जुलाई क्रांति के बाद से अब तक आवामी लीग के कार्यकर्ताओं व नेताओं पर हमले जारी हैं। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि मोहम्मद युनूस की अंतरिम सरकार से लेकर BNP और तारिक रहमान की सरकार के कार्यकाल के दौरान भी अल्पसंख्यकों व आवामी लीग के कार्यकर्ताओं पर हमले जारी हैं।
उन्होंने आगे कहा कि हर दिन और हर रात वे हमारे पार्टी के लोगों को मार रहे हैं, गिरफ्तार कर रहे हैं या उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कर रहे हैं। वे घरों में घुसकर पुरुषों और महिलाओं पर हमला कर रहे हैं, बुजुर्गों को पीट रहे हैं और परेशान कर रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में मैं नहीं समझ पाती कि मेरी प्रत्यर्पण कैसे शर्त बन गई। मैं अपने ही देश वापस जा रही हूं, मुझे समझ नहीं आता कि वे (तारिक रहमान) इस पर आपत्ति क्यों कर रहे हैं। वे प्रत्यर्पण संधि की बात कर रहे हैं, मैं अपने देश वापस स्वयं जाना चाहती हूं। मैं वापस जाऊंगी। क्या मैं पूरी जिंदगी विदेश में रह सकती हूं? मुझे अपने देश, अपने लोगों के पास लौटना ही है।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था लगभग 70 अरब डॉलर से बढ़कर लगभग 450 अरब डॉलर हो गई थी, प्रति व्यक्ति आय 482 डॉलर से 2,784 डॉलर पहुंची थी। अब GDP वृद्धि दर घटकर 2.22% रह गई है (पहले 6.80%), औद्योगिक क्षेत्र में 54 साल में पहली बार नकारात्मक वृद्धि, बेरोजगारी और बिजली-गैस की कमी बढ़ी है।
हसीना ने आगे कहा कि न्यायपालिका को राजनीतिक बदला लेने का उपकरण बना दिया गया है। यह मेरे लिए नया नहीं है। साल 1975 में मैंने अपना पूरा परिवार खो दिया था। साल 2004 में मुझे खत्म करने के लिए ढाका में एक रैली में बम ब्लास्ट किया गया था। मुझे मारने के इरादे से ग्रेनेड फेंके गए। उस हमले में 24 लोगों की मौत हुई और 300 से अधिक घायल हुए।
उन्होंने कहा कि जब तक मैं सत्ता में भी थी। तब तक हमारे दुनिया के सभी देशों के साथ अच्छे संबंध थे। उन्होंने अपने पिता बंगबंधु शेख मुजीबर उर रहमान को याद करते हुए कहा कि उनका मानना था, दुनिया के सभी मुल्कों के साथ दोस्ती, किसी से दुश्मनी नहीं। उन्होंने कहा कि हमने हर देश के साथ अच्छे संबंध रखे और हमारा ध्यान बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था, गरीबी उन्मूलन, युवाओं के लिए नौकरियां, आधुनिक विज्ञान, कंप्यूटर, प्रौद्योगिकी के अवसरों पर था ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को बना सकें। मैं जानती थी कि अगर मैं निजी क्षेत्र को महत्व नहीं दूंगी तो नौकरियां नहीं बनेंगी। अगर गांवों में मेरे लोगों की क्रय शक्ति नहीं बढ़ेगी तो औद्योगीकरण नहीं होगा। हमारी अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है, लेकिन मैं औद्योगीकरण भी चाहती थी।
हसीना ने बांग्लादेश सरकार द्वारा चीनी फाइटर जेट खरीदने पर कहा कि मैंने बिजली उत्पादन को 29 हजार मेगावाट तक बढ़ाया। हर घर बिजली पहुंचाई। बिजली पैदा करने के लिए कुछ जरूरी चीजें खरीदनी पड़ती है, जिसके लिए सरकार के पास पैसे नहीं है। लोगों को बिजली नहीं मिल रही। गैस की कमी के कारण हमारे छह में से पांच उर्वरक कारखाने बंद हैं। वे उर्वरक नहीं दे पा रहे। जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं। उनके पास हमारी जैसी विशाल सामाजिक सुरक्षा नेट कार्यक्रम नहीं है। उन्होंने वैक्सीन नहीं खरीदे और हजारों बच्चे खसरे से मर गए, वे उद्योगों के लिए चल पूंजी नहीं दे पा रहे। ऐसी कठिन परिस्थितियों में लड़ाकू विमान खरीदने की यह विलासिता क्यों? यही मेरा भी सवाल है।
उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय की "दूसरा पाकिस्तान" वाली टिप्पणी का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि यह भावनात्मक बयान नहीं बल्कि बांग्लादेश में बढ़ते चरमपंथ, सांप्रदायिक राजनीति और कमज़ोर होती संस्थाओं को लेकर एक गंभीर चेतावनी है। उन्होंने अल-कायदा नेटवर्क, धार्मिक स्थलों पर हमलों और आतंकवाद-रोधी यूनिटों को कमजोर किए जाने का जिक्र किया।