
गिरती जन्मदर से जूझ रहे सिंगापुर (Singapore) ने आबादी बढ़ाने के लिए एक ऐतिहासिक वित्तीय पैकेज का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग (Lawrence Wong) ने परिवारों को बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से नई सहायता योजना का ऐलान किया है। इसके तहत एक बच्चे के जन्म से उसके 17 साल का होने तक परिवार को करीब 70 हज़ार सिंगापुर डॉलर जिसकी भारतीय करेंसी में वैल्यू करीब 52.5 लाख भारतीय रुपए है, तक की सरकारी मदद मिलेगी। नई व्यवस्था अगले साल अप्रैल से शुरू होगी। नई योजना में बच्चे के जन्म के समय परिवार को 10 हज़ार सिंगापुर डॉलर जिसकी भारतीय करेंसी में वैल्यू करीब 7.5 लाख रुपए है, का बेबी गिफ्ट मिलेगा।
इसके बाद बच्चे की शिक्षा, स्वास्थ्य और देखभाल से जुड़े खर्चों में सरकार अलग-अलग तरह से सहायता देगी। बच्चों के लिए प्री-स्कूल की फीस कम करने की भी तैयारी है, जिससे माता-पिता पर आर्थिक दबाव को कम किया जा सके। 17 साल की उम्र तक सहायता जारी रहने के बाद उच्च शिक्षा के खर्च में भी सरकार की तरफ से सहायता का प्रावधान होगा।
सिंगापुर में घटती जन्मदर चिंता का विषय बन गई है, लेकिन यह समस्या नई नहीं है। देश ने 2001 में बेबी बोनस योजना शुरू की थी। उस समय प्रति महिला प्रजनन दर 1.41 थी। इसके बावजूद 2025 में यह घटकर करीब 0.87 रह गई। आबादी को स्थिर रखने के लिए करीब 2.1 की प्रजनन दर जरूरी मानी जाती है। यानी आर्थिक मदद के बावजूद लोग बच्चे पैदा करने से पीछे हट रहे हैं। एक सर्वे में सामने आया है कि सिंगापुर में हर चार में से एक व्यक्ति भविष्य में बच्चे पैदा नहीं करना चाहता।
सिंगापुर अकेला देश नहीं है जहाँ जन्मदर घट रही है और इसे बढ़ाने के लिए सरकार वित्तीय सहायता दे रही है। दक्षिण कोरिया, जापान, हंगरी, फ्रांस, रूस और चीन भी अलग-अलग समय पर परिवारों को आर्थिक सहायता, छुट्टियाँ और दूसरी सुविधाएं देकर लोगों को ज़्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर चुके हैं, जिससे जन्मदर को बढ़ाया जा सके।