UK Prime Minister Keir Starmer: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए टिकटॉक, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। सरकार बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा बढ़ाने के लिए गेमिंग और लाइवस्ट्रीमिंग सेवाओं पर भी सख्त नियम लागू करने की तैयारी में है।

Social Media Restriction: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर व्यापक प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इस प्रस्तावित कदम के तहत टिकटॉक, स्नैपचैट और इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए प्रतिबंधित किए जाएंगे। सरकार केवल सोशल मीडिया तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन गेमिंग और लाइवस्ट्रीमिंग सेवाओं पर भी कार्रवाई करेगी जहां बच्चे अजनबियों के साथ बातचीत कर सकते हैं। कीर स्टार्मर का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियां बच्चों को ऐसे कंटेंट के संपर्क में ला रही हैं जो उनके लिए खतरनाक हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई प्लेटफॉर्म बच्चों को लंबे समय तक जोड़े रखने और उन्हें इसकी लत लगाने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार यह प्रस्तावित प्रतिबंध बच्चों को अधिक सुरक्षित, खुश और स्वतंत्र वातावरण देगा। उनका मानना है कि इस कदम से बच्चों और उनके अभिभावकों की ऑनलाइन आदतों में बड़ा बदलाव आएगा।
ब्रिटिश सरकार इस कानून को दिसंबर तक संसद से पारित कराने की तैयारी कर रही है। योजना के अनुसार इसे अगले साल वसंत ऋतु से लागू किया जा सकता है। यदि यह कानून लागू होता है तो ब्रिटेन उन देशों की बढ़ती सूची में शामिल हो जाएगा जो बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया पर कड़े प्रतिबंध लगा रहे हैं। स्टार्मर ने कहा कि इस नीति को तैयार करने में ऑस्ट्रेलिया के अनुभव से प्रेरणा मिली है। ऑस्ट्रेलिया ने पिछले वर्ष 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बनने का दावा किया था। ब्रिटिश सरकार जुलाई में इस संबंध में विस्तृत नियम जारी करेगी।
प्रस्तावित नियमों में 18 वर्ष से कम उम्र के युवाओं के लिए रात के समय सोशल मीडिया उपयोग पर रोक और अनंत स्क्रॉलिंग जैसी सुविधाओं पर विराम लगाने जैसे उपाय भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इस प्रस्ताव पर कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। यूट्यूब ने चेतावनी दी है कि पूर्ण प्रतिबंध बच्चों को अपेक्षाकृत कम सुरक्षित ऑनलाइन सेवाओं की ओर धकेल सकता है, जिससे नए जोखिम पैदा होने की आशंका है।