Strange Law Of Singapore: भारत जैसे देशों के लिए ये नियम वहां के लोगों का पागलपन जैसा लग सकते हैं लेकिन जिन देशों में ये लागू होते हैं वहां रोजमर्रा के कामों में भी इनका बेहद ध्यान रखा जाता है।
Strange Law Of Singapore: दुनिया में कई ऐसे देश हैं जिनकी अजीबोगरीब परंपराएं, नियम-कानून कई लोगों को अपना सिर पकड़ने पर मजबूर कर देंगे। भारत जैसे देश के लोगों को ये पागलपन भी लग सकता है। लेकिन ये नियम उन देशों के लिए काफी सामान्य हैं जहां ये लागू होता है। ये उन देशों लिए काफी सामान्य है और रोजमर्रा की जिंदगी में इन बातों का ध्यान रखा जाता है। ऐसे अजीबोगरीब कानून वाले देश में गिना जाता है सिंगापुर, जहां के नियमों के बारे में हम आपको बता रहे हैं।
सिंगापुर को 'शेरों का शहर' भी कहां जाता है। ये देश अपने पर्यटन के लिए भी पूरी दुनिया में फेमस है। जिसका आधार यहां का कल्चर और उसकी खूबसूरती है। लेकिन यहां आने वाले लोगों को यहां के कड़े और अजीबो-गरीब नियम-कायदे से चलना होता है। अगर कोई भी इन नियमों को तोड़ता हुआ दिख जाता है तो उसे सजा भी दी जाती है।
सिंगापुर में च्युइंग गम की बिक्री पर बैन लगा हुआ है, यहां तक कि इसका आयात भी नहीं होता है। अगर कोई चोरी-छिपे इसकी स्मगलिंग करता है या फिर कोई शख्स कहीं से च्युइंग गम लागकर चबाता दिखता है तो उसे भारी जुर्माने के साथ ही जेल की सजा तक हो जाती है।
सिंगापुर में टिश्यू पैक का इस्तेमाल सीट रिजर्व करने के लिए किया जाता है। अगर किसी रेस्टोरेंट में कोई सीट खाली हो और उस पर टिश्यू पैक रखा हो, तो इसका मतलब है कि वह सीट रिजर्व की हुई है। ऐसा बसों और ट्रेन की सीट के लिए भी होता है।
कहा जाता है कि सिंगापुर के रहने वाले लोग काफी अंधविश्वास पर भरोसा करते हैं। जबकि वे काफी पढ़े-लिखे होते हैं। जैसे यहां पर माना जाता है कि अंक 4 और 8 मृत्यु और भाग्य का प्रतीक है। वहीं ये भी मान्यता है कि अगर आप आधी रात को चमेली और फ्रेंगिपानी के फूल को सूंघते हैं, तो कुछ भयावह घटनाएं आपके साथ घट सकती हैं।
सिंगापुर में भी चीन-कोरिया की तरह हर पुरुष नागरिक और स्थायी निवासी को 18 साल की उम्र पूरी करने के बाद अनिवार्य रूप से सेना में भर्ती होना पड़ता है। जिसकी अवधि दो साल की होती है।
भारत में अक्सर लोग चाय में ऊपर से दूध या मलाई डालकर पीते हैं लेकिन सिंगापुर में चाय मे मक्खन मिलाकर पीने का रिवाज़ है। यहां 1930 के दशक से ही हैनानी कॉफ़ी शॉप्स में पारंपरिक कॉफ़ी में मक्खन मिलाया जाता रहा है ताकि इसे एक कारमेलाइज़्ड स्वाद दिया जा सके और रोबस्टा कॉफ़ी बीन्स की बनावट को चिकना किया जा सके।
सिंगापुर की एक तरीका भारतीयों को अपना सा लग सकता है वो है यहां की बोलचाल। दरअसल सिंगापुर में भी इंग्लिश और स्थानीय भाषा को मिलाकर बात की जाती है जैसे भारत में हिंदी और अंग्रेजी को मिलाकर बात की जाती है। सिंगापुर में इस तरह की बोलचाल की भाषा को सिंग्लिश कहते हैं। सिंग्लिश में अंग्रेज़ी के साथ सिंगापुर स्थानीय भाषाओं (जैसे चीनी, मलयालम और तमिल) को मिलाकर बोला जाता है, इसका उपयोग सिंगापुर के लोग सामान्य बातचीत में करते हैं।
सिंगापुर में लोगों को कतार (लाइन) में लगकर खड़े होने की आदत है, चाहे वो बस स्टॉप हो, मॉल हो या फूड कोर्ट। ये उनके अनुशासन और संगठन का प्रतीक माना जाता है।
सिंगापुर में उपहार देने की परंपरा में खास ध्यान दिया जाता है। गिफ्ट देते समय इसे दोनों हाथों से देना और लेना एक शिष्टाचार का हिस्सा माना जाता हैं।
सिंगापुर में वेटरों को टिप्स देना स्वीकार्य नहीं है, अगर आपने दिया भी तो वो आपको पैसे वापस दे देंगे।
सिंगापुर में आप जिस तरह से अपनी चॉपस्टिक्स को रखते है उसमें भी अन्धविश्वास माना जाता है जैसे सिंगापुर के लोग कभी चॉपस्टिक्स को ऊपर की तरफ नहीं रखते, सिर्फ अंतिम संस्कार के दौरान ही चॉपस्टिक को सीधा रखते हैं।
सिंगापुर के ये ट्रेडिशन्स और कानून जो दूसरे देशों के लोगों को सुनने में अजीब लगते है लेकिन यहां के लोग इन सब बातों में काफी मानते और इनका पालन करते हैं। माना जाता है कि ये नियम सिंगापुर को एक अनुशासित, स्वच्छ, और संगठित समाज बनाता है, जो विविधता और एकता को महत्व बताता है।