NOAA Climate Forecast El Niño: 2026 में सुपर एल नीनो के संकेत मिल रहे हैं, अमेरिकी एजेंसी नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन ने चेतावनी दी है। बढ़ते समुद्री तापमान से दुनिया भर में गर्मी, बारिश और तूफानों के पैटर्न में बड़े बदलाव की आशंका नजर आ रही है।
El Niño Latest Update 2026: दुनिया के मौसम में एक बड़ा बदलाव आने के संकेत मिल रहे हैं। प्रशांत महासागर के आसपास बनने वाले जलवायु पैटर्न में धीरे-धीरे बदलाव दिख रहा है। वैज्ञानिकों की नजर अब 2026 पर टिकी है। फिलहाल ला नीना कमजोर पड़ रही है और इसकी जगह एक न्यूट्रल स्थिति बन रही है। लेकिन असली चिंता यह है कि साल के दूसरे हिस्से में एल नीनो की वापसी हो सकती है और अगर यह ज्यादा ताकतवर हुआ, तो इसे 'सुपर एल नीनो' भी कहा जा सकता है।
अमेरिकी एजेंसी नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के मुताबिक, मौजूदा ला नीना स्थिति धीरे-धीरे खत्म हो रही है। अगले एक महीने में ENSO सिस्टम न्यूट्रल स्थिति में आ सकता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मई से जुलाई 2026 के बीच न्यूट्रल हालात बने रहेंगे, जिसकी संभावना करीब 55% है। इसके बाद जून से अगस्त के बीच एल नीनो के विकसित होने की संभावना बढ़कर लगभग 62% हो जाती है। यानी साफ संकेत हैं कि साल के दूसरे हिस्से में मौसम का मिजाज बदल सकता है।
एल नीनो दरअसल एक बड़ा जलवायु सिस्टम ENSO (एल नीनो-सदर्न ऑसिलेशन) का हिस्सा है। इसमें प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। जब यह गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है यानी औसत से करीब 2.5 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा तो इसे आम बोलचाल में 'सुपर एल नीनो' कहा जाता है।
हालांकि यह कोई आधिकारिक वैज्ञानिक टर्म नहीं है, लेकिन 1982-83, 1997-98 और 2015-16 जैसे बेहद ताकतवर एल नीनो इसी कैटेगेरी में माने जाते हैं।
मौजूदा डेटा में समुद्र के तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखी जा रही है। कई जलवायु मॉडल एक जैसी दिशा में संकेत दे रहे हैं, जो वैज्ञानिकों के लिए एक अहम बात होती है।हालांकि अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि वसंत का समय ENSO की भविष्यवाणी के लिए सबसे मुश्किल माना जाता है। इसके बावजूद, संकेत इतने मजबूत हैं कि वैज्ञानिक इस पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
एल नीनो का असर सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं रहता है, यह पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करता है। कुछ जगहों पर भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। वहीं कई इलाकों में सूखा और हीटवेव देखने को मिल सकती है। खेती, जल संसाधन और इकोसिस्टम पर इसका सीधा असर पड़ता है।
अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों में आमतौर पर ज्यादा बारिश और ठंडक देखने को मिलती है, जबकि उत्तरी हिस्सों में सर्दियां हल्की हो सकती हैं।
एल नीनो का एक बड़ा असर अटलांटिक महासागर के तूफानों पर भी पड़ता है। आमतौर पर एल नीनो के दौरान हवा की दिशा और गति बदल जाती है, जिससे तूफानों का बनना और तेज होना मुश्किल हो जाता है। इसलिए ऐसे सालों में तूफानों की संख्या कम हो सकती है। हालांकि, यह भी सच है कि कम तूफान होने का मतलब सुरक्षित साल नहीं होता है एक भी बड़ा तूफान भारी तबाही ला सकता है।
फिलहाल अनुमान यही है कि 2026 की गर्मियों तक हालात न्यूट्रल रह सकते हैं। लेकिन साल के आखिर तक एल नीनो मजबूत हो सकता है। अगर समुद्र का तापमान तेजी से बढ़ता रहा तो यह एक शक्तिशाली या सुपर एल नीनो में बदल सकता है। लेकिन, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह कितना ताकतवर होगा। आने वाले महीनों में नए डेटा और मॉडल अपडेट से तस्वीर और साफ होगी।