
Middle East Crisis Latest Update
Israel Attack on Lebanon Beirut: मिडिल ईस्ट में हालात फिर बिगड़ते नजर आ रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को रोकने के लिए एक अस्थायी समझौता हुआ था। उम्मीद थी कि वेस्ट एशिया में इससे तनाव कम होगा, लेकिन जमीन पर तस्वीर कुछ और ही नजर आ रही है। लेबनान में इजराइल द्वारा किए जा रहे ताजा हमलों ने पूरे समीकरण को बदल दिया है।
एक तरफ शांति की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ बमबारी जारी है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है क्या यह युद्धविराम टिक पाएगा या फिर क्षेत्र एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ रहा है?
अमेरिका और ईरान के बीच हुआ यह समझौता महज दो हफ्तों के लिए था। दोनों देशों ने इसे अपनी-अपनी जीत बताया, लेकिन जमीनी स्तर पर हमले पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। ड्रोन और मिसाइलों की आवाजाही जारी रही। ऐसे में यह साफ था कि यह शांति बहुत मजबूत नहीं है। ऊपर से लेबनान में बढ़ते हमलों ने इस समझौते की नींव और हिला दी है।
बुधवार का दिन लेबनान के लिए बेहद डरावना रहा है। राजधानी बेरूत में एक के बाद एक कई धमाके हुए। लोग संभल भी नहीं पाए थे कि अगला विस्फोट हो गया। बताया जा रहा है कि कुछ ही मिनटों में सौ से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसमें सिर्फ सैन्य ठिकाने ही नहीं थे बल्कि रिहायशी इलाके भी शामिल थे।
इस हमले के बाद जो आंकड़े आए हैं वो डराने वाले हैं। जानकारी के लिए बता दें इन हमलों में अब तक 254 लोगों की मौत हो चुकी है और 1100 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा असर राजधानी बेरूत में देखने को मिला है, जहां अकेले 90 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई है। हालात इतने अचानक बिगड़े कि कई लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि हमले बिना किसी चेतावनी के किए गए, जिससे बच निकलना लगभग नामुमकिन हो गया।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब उस आखिरी पुल को भी नष्ट कर दिया गया, जो दक्षिणी लेबनान को बाकी देश से जोड़ता था। यह पुल लितानी नदी पर बना था और लोगों के लिए जीवनरेखा का काम करता था। अब हालात ऐसे हैं कि दक्षिणी इलाका लगभग कट चुका है। लोगों को खाने-पीने की दिक्कते हो रही हैं। दवाइयों की सप्लाई प्रभावित हो गई है, यहां तक कि हमलों की चपेट में अस्पताल भी नहीं बच सके हैं। इजराइल इस इलाके को एक तरह से 'बफर जोन' बनाने की बात कही है। जानकरी के लिए आपको बता दें बफर जोन, वह क्षेत्र होता है जो दो दुश्मन पक्षों के बीच बनाया जाता है, ताकि उनके बीच सीधा टकराव न हो और हमलों से दूरी बनी रहे।
इन हालात के बीच अब तक करीब 12 लाख लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं। बड़े पैमाने पर विस्थापन देखने को मिल रहा है।
अब सबसे बड़ा विवाद यही है कि क्या यह युद्धविराम लेबनान पर भी लागू था या नहीं? ईरान का कहना है कि समझौता पूरे क्षेत्र के लिए था, जिसमें लेबनान भी शामिल है। लेकिन अमेरिका और इजराइल का रुख अलग है। उनका कहना है कि यह समझौता सिर्फ ईरान से जुड़े सीधे टकराव तक सीमित था। यही बात अब तनाव की बड़ी वजह बन गई है। हर पक्ष अपनी-अपनी व्याख्या दे रहा है, और इसी बीच जमीन पर हिंसा जारी है।
इन्हीं सब हमलों के बीच ईरान ने बड़ा कदम उठाते हुए होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद कर दिया है। आपको ज्ञात होगा यह कोई साधारण रास्ता नहीं है। दुनिया का करीब 20% तेल सप्लाई इसी रास्ते से होता है। इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसे सीधा प्रभाव व्यापर पर देखने को मिल सकता है।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि इजराइल इस पूरे समझौते से पूरी तरह संतुष्ट नहीं था। उसे आखिरी समय में इसकी जानकारी मिली। हालांकि, बाद में कहा गया कि दोनों देशों के बीच बातचीत हुई थी। सच क्या है, यह पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि भरोसे की कमी साफ नजर आ रही है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि इजराइल और ईरान दोनों पक्ष अपने आप को विजेता बता रहे हैं। अमेरिका का कहना है कि उसने क्षेत्र में बड़ा सैन्य दबदबा दिखाया है। वहीं ईरान का दावा है कि उसने अपनी शर्तें मनवा ली है। ऐसे में जब दोनों पक्ष खुद को जीता हुआ बता रहे हों तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है असली तस्वीर कहीं ज्यादा जटिल है।
क्या फिर भड़केगा युद्ध? फिलहाल हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। एक तरफ शांति की कोशिशें हैं, तो दूसरी तरफ जमीन पर लगातार हमले हो रहे हैं। अगर यही स्थिति बनी रही, तो यह युद्धविराम ज्यादा दिनों तक नहीं टिकेगा। और अगर यह टूटता है, तो इसका असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहेगापूरा क्षेत्र इसकी चपेट में आ सकता है।
Updated on:
09 Apr 2026 04:55 pm
Published on:
09 Apr 2026 04:48 pm
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