AI के दौर में भी दुनिया की सबसे 'हाइपर-डिजिटलाइज्ड' शिक्षा प्रणालियों में शुमार है स्वीडन और फिनलैंड बेसिक लर्निंग पर आ गए हैं। डिजिटल छोड़ प्राथमिक कक्षाओं में छपी हुई किताबों- कागज-कलम-रबड़ को प्राथमिकता दी जा रही है।
Sweden-Finland Return Basics Learning: दुनिया की सबसे 'हाइपर-डिजिटलाइज्ड' शिक्षा प्रणालियों में शुमार स्वीडन अब प्राथमिक कक्षाओं में छपी हुई किताबों को प्राथमिकता दे रहा है। कक्षाओं में फिर से कागजों की खुशबू और बोर्ड से पढ़ाई लौट रही है। यह बदलाव केवल स्वीडन तक सीमित नहीं है; फिनलैंड भी स्कूलों में फोन पर कड़े प्रतिबंध लगा रहा है, फ्रांस 'डिजिटल डिटॉक्स' अपना चुका है और नीदरलैंड्स ने टैबलेट-स्मार्टवॉच के उपयोग को सीमित कर दिया है। अमरीका के भी कई राज्यों में भी अब मुद्रित पाठ्यपुस्तकों की मांग फिर से बढ़ रही है। शिक्षाविदों का मानना है कि 'स्क्रीन एडिक्शन' ने बच्चों में गहरी समझ के साथ पढ़ने और हाथ से लिखने जैसे बुनियादी कौशल को नुकसान पहुंचाया है।
नॉर्वे और अमरीका के शोध बताते हैं कि हाथ से लिखते समय मस्तिष्क के कई हिस्से एक साथ सक्रिय होते हैं। अंगुलियों का पेन पर दबाव और अक्षरों की बनावट मस्तिष्क में 'मेमोरी ट्रेस' को मजबूत करती है। इसके विपरीत, कीबोर्ड पर टाइपिंग एक यांत्रिक प्रक्रिया है, जहाँ दिमाग सूचना को प्रोसेस करने के बजाय केवल उसे 'रिकॉर्ड' करता है। यही कारण है कि कागज पर लिखने वाले विद्यार्थी जटिल विषयों को बेहतर ढंग से समझते हैं।
यूनेस्को की एक हालिया रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि तकनीक कभी भी शिक्षक की जगह नहीं ले सकती। डिजिटल शिक्षा कोडिंग और एआइ के दौर के लिए तैयार करती है, लेकिन आरोप यह भी है कि 'एड-टेक' इंडस्ट्री ने शिक्षा को एक बाजार बना दिया है। अनियंत्रित स्क्रीन टाइम ने बच्चों को 'सक्रिय शिक्षार्थी' की बजाय 'निष्क्रिय उपभोक्ता' में बदल दिया है। ऐसे में एक हाइब्रिड मॉडल की जरूरत महसूस की जा रही है।
डिजिटल इंडिया के दौर में यह बहस भारत के लिए और भी महत्वपूर्ण है। जैसा कि स्वीडन की स्कूल मंत्री लोटा एडहोल्म कहती हैं समाधान 'डिजिटल बनाम पारंपरिक' की जंग में नहीं, बल्कि इनके सामंजस्य में है। भविष्य स्मार्ट क्लासरूम और कागज—कलम के बीच के हाइब्रिड तालमेल में छिपा है। जटिल गणनाओं के लिए एआइ का सहारा लिया जाए, लेकिन कविता समझने के लिए हाथ में किताब हो। जहाँ कोडिंग सीखी जाए, लेकिन सुंदर लिखावट का अभ्यास भी न छूटे