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Bangladesh Violence: तस्लीमा नसरीन बोलीं- ‘बांग्लादेश में जिहाद के हैं दो चेहरे, दोनों का मकसद सिर्फ एक, भारत को…’

Bangladesh Violence: तस्लीमा नसरीन ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में जिहाद के दो स्वरूप हैं। दोनों का काम एक ही है। पढ़ें पूरी खबर...

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Jan 05, 2026
तस्लीमा नसरीन (Photo-X @taslimanasreen)

Bangladesh Violence: भारत में स्वनिर्वासन में रह रही लेखिका तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर वहां की सरकार को आईना दिखाया है। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि बांग्लादेश में जिहाद के दो अलग रूप हैं। एक वर्ग है जो मदरसों में दाढ़ी और टोपी में पढ़ता है। जबकि दूसरा वर्ग यूनिवर्सिटीज में पढ़ लिख कर पश्चिमी कपड़ों में सामने आता है। अलग रूप होने के बाद भी दोनों का काम और सोच समान है। वो है भारत के प्रति शत्रुता।

उनका साझा सपना युद्ध की ओर बढ़ना और पाकिस्तान के साथ खड़े होना बताया जाता है। तस्लीमा ने चेतावनी के लहजे में कहा कि अगर भारत-बांग्लादेश के सांस्कृतिक संबंध टूटते हैं तो कट्टरता को बढ़ावा मिलेगा। नफरत और हिंसा की बजाय संवाद, संस्कृति और शांति में ही समाधान है।

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हिंदू व्यापारी की हत्या मामले में तीन गिरफ्तार

बांग्लादेश के शरियतपुर जिले में एक हिंदू व्यापारी खोकन दास की बेरहमी से हत्या के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ढाका में आरएबी-8 और खुफिया विंग के कंपनी कमांडर एएसपी शाहजहां क अगुवाई वाली टीम ने किशोरगंज से सोहाग, रब्बी और पलाश नाम के संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। खोकन दास ने अपनी मृत्यु से पहले इनके नाम बताए थे। बताते चले कि 31 दिसंबर की रात को खोकन दास पर हमला कर लूटपाट और उन्हें पेट्रोल डाल कर जलाने का प्रयास किया था। खोकन दास की उपचार के दौरान मौत हो गई थी।

गोपालगंज सीट से हिंदू नेता के नामांकन पर लगी रोक

इधर, बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने वाले हैं। गोबिंद चंद्र प्रमाणिक ने संसदीय चुनावों के लिए गोपालगंज-3 सीट से पर्चा दाखिल किया था, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने शनिवार को उनका नामांकन वापस कर दिया। इसी सीट से शेख हसीना सांसद थीं। गोबिंद चंद्र प्रमाणिक के ताल्लुक भारत के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ बताया जाता है। बता दें कि इस सीट पर 50% से ज्यादा हिंदू वोटर्स हैं। गोबिंद निर्दलीय चुनाव लड़ना चाहते थे। वह पेशे से वकील हैं और बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत (BJHM) नामक संगठन के महासचिव भी हैं। उन्होंने BNP पर इसका दोष मढ़ा है।

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