
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने कहा कि अमेरिका (America) और चीन (China) ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि हम आने वाले दिनों में भारत (India) के साथ भी बहुत बड़ी डील करने वाले हैं। ट्रंप ने कहा कि हर कोई डील करना चाहता है। उसका हिस्सा बनना चाहता है। कुछ महीने पहले तक मीडिया कह रही थी कि क्या वाकई ऐसा है, जिसे इसमें कोई दिलचस्पी हो? हमने कल ही चीन के साथ ट्रेड डील पक्की की है। हमने कुछ बेहतरीन सौदे किए हैं। हम आने वाले दिनों में भारत के साथ बहुत बड़ा सौदा करने जा रहे हैं।
ट्रंप ने जोर देकर कहा कि हम हर दूसरे देश के साथ सौदे नहीं करने जा रहे हैं। कुछ लोगों को हम पत्र भेजकर धन्यवाद कहेंगे। उन्होंने कहा कि हम उन देशों से कहेंगे कि आपको 25, 35 या 45 फीसदी का भुगतान करना होगा। उन्होंने कहा कि हम भारत के लिए दरवाजे खोलने जा रहे हैं। हम चीन के साथ ट्रेड डील में चीन के लिए अपने दरवाजे खोलने जा रहे हैं। हमारे हर देश के साथ संबंध अच्छे रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति निवास व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने रॉयटर्स से कहा कि चीन के साथ ट्रेड डील रेयर अर्थ मिनरल की शिपमेंट में तेजी लाने पर केंद्रित था। इस वजह से ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित हुई थी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन और चीन ने जिनेवा समझौते को लागू करने के लिए एक रूपरेखा के लिए एक अतिरिक्त समझ पर सहमति व्यक्त की है। रॉयटर्स को एक अधिकारी ने कहा कि इसका मकसद महत्वपूर्ण खनिजों और चुम्बकों पर चीन के प्रतिबंधों के कारण होने वाली देरी को हल करना है, जिसने ऑटोमोटिव, रक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों सहित अमेरिकी उद्योगों को काफी प्रभावित किया था।
कुछ दिनों पहले जानकारी सामने आई थी कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील अटक गई है। अमेरिका अपने कुछ कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करने की मांग कर रहा है, लेकिन भारत को यह मंजूर नहीं है। अमेरिका चाहता है कि भारत मक्का और सोयाबनी जैसे कृषि उत्पादों पर टैरिफ में कमी लाए। भारत सरकार खाद्य सुरक्षा और किसानों को नुकसान से बचाना चाहती है। वहीं अगर अगर 9 जुलाई तक कोई छोटा समझौता नहीं होता है, तो भारतीय उद्योगों को अमेरिका में 26% तक टैक्स देना पड़ सकता है।
भारत सरकार का कहना है कि ट्रंप प्रशासन का 10 फीसदी का बेसलाइन टैरिफ गलत है। भारत सरकार चाहती थी कि टेक्सटाइल, चमड़े के सामान, दवाओं और कुछ इंजीनियरिंग के सामान और ऑटो पार्ट्स जैसे उत्पादों पर कोई टैक्स न लगे। दूसरी ओर अमेरिकी अधिकारी चाहते हैं कि यह समझौता जल्दी हो जाए। उन्होंने भारत को बताया है कि ट्रंप प्रशासन तुरंत जीरो टैरिफ पर नहीं जा सकता, जबकि भारत चाहता है कि एक बार समझौता होने के बाद अमेरिका भविष्य में कोई नया टैक्स न लगाए।