
Trump Tells Netanyahu to Withdraw from Syria: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) की दहकती सियासत के बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सबसे करीबी सहयोगियों में से एक, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बेहद सख्त और सीधे शब्दों में नसीहत दी है। हाल ही में हुई एक फोन कॉल के दौरान ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा कि वे सीरिया और दक्षिणी लेबनान से अपनी सेनाओं को वापस बुलाने (रीडिप्लॉय) की प्रक्रिया तुरंत शुरू करें। ट्रंप का मानना है कि इन क्षेत्रों में इजरायल की सैन्य मौजूदगी पूरे इलाके को बारूद के ढेर पर बिठा रही है और इससे एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का खतरा लगातार मंडरा रहा है।
एक्सियोस (Axios) से बातचीत में एक अमेरिकी ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत में कहा सीरिया में इजरायल की मौजूदगी तनाव बढ़ा रही है। इसकी वजह से व्यापक संघर्ष का खतरा पैदा हो सकता है। अमेरिकी अधिकारी ने यह भी बताया कि डोनाल्ड ट्रंप ने लेबनान के संबंध में भी यही संदेश दिया।
इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने पुष्टि की कि बातचीत के दौरान बेंजामिन नेतन्याहू ने इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को प्रमुखता से उठाया। PMO ने जारी बयान में कहा, 'प्रधानमंत्री ने अपनी ओर से इजरायल की सीमाओं के साथ सुरक्षा क्षेत्रों (सिक्योरिटी जोन) की आवश्यकता पर जोर दिया।'
अमेरिकी अधिकारी समझौते की कोशिश कर रहे हैं, जिसके तहत 2024 के अंत में असद शासन के पतन के बाद दक्षिणी सीरिया में कब्जाए गए क्षेत्रों से इजरायल धीरे-धीरे अपनी सेना हटाए। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि बेंजामिन नेतन्याहू इस तरह की रियायतों का विरोध कर रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन इजरायल-लेबनान Framework Agreement को लागू कराने के लिए भी दबाव बना रहा है। इसी समझौते के तहत इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के दो पायलट ज़ोन से अपनी सेना हटाने की प्रतिबद्धता जताई थी। हालांकि अब तक वहां से सैन्य वापसी नहीं हुई है।
व्हाइट हाउस की तरफ से कथित बातचीत पर टिप्पणी से इनकार किया है, हालांकि रिपोर्ट का खंडन नहीं किया गया है। अमेरिकी अधिकारी ने एक्सियोस से कहा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मजबूत संबंध है। इजरायल हमेशा अमेरिका महत्वपूर्ण सहयोगी रहा है।' उन्होंने आगे कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप से बड़ा इजरायल का कोई मित्र और शांति के लिए संघर्ष करने वाला कोई नेता नहीं रहा है।'