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क्या खाड़ी देशों की एकजुटता ने टाल दिया बड़ा मिडिल ईस्ट युद्ध? जानें क्यों ट्रंप ने रोका ईरान पर हमला

Donald Trump Iran Attack: कतर, सऊदी अरब और UAE की अपील के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर प्रस्तावित अमेरिकी हमला टाल दिया है। जानिए कैसे खाड़ी देशों की कूटनीति ने मध्य पूर्व में बड़ा युद्ध होने से रोक दिया।

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May 19, 2026
Trump Puts Planned Iran Attack on Hold (AI Image)

Trump Puts Planned Iran Attack on Hold: मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव के बेहद करीब पहुंच गया था, लेकिन आखिरी वक्त पर हालात बदल गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित अमेरिकी सैन्य हमला फिलहाल रोक दिया है। ट्रंप के मुताबिक, यह फैसला कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शीर्ष नेताओं की अपील के बाद लिया गया।

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक लंबा बयान जारी करते हुए कहा कि कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) और UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उनसे सैन्य कार्रवाई टालने की अपील की थी, क्योंकि ईरान के साथ गंभीर बातचीत जारी है।

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'हमला कल होना था', ट्रंप का बड़ा दावा

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई 'अगले दिन' के लिए तय थी, लेकिन खाड़ी देशों के नेताओं ने हस्तक्षेप कर उन्हें कुछ समय देने के लिए कहा। ट्रंप के अनुसार, इन देशों को उम्मीद है कि तेहरान के साथ किसी समझौते तक पहुंचा जा सकता है।

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि उन्हें ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य हमले को रोकने के लिए कहा गया और उन्होंने अपने सहयोगी देशों के सम्मान में ऐसा किया। हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि अगर बातचीत विफल होती है तो अमेरिका बड़े स्तर की सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है।

अमेरिका ने सेना को रखा अलर्ट पर

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, ज्वाइंट चीफ्स चेयरमैन जनरल डेनियल कैन और अमेरिकी सेना को पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान के साथ समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका 'फुल और लार्ज स्केल असॉल्ट' कर सकता है।

ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौते का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास न्यूक्लियर वेपन न हों।

खाड़ी देशों की एकजुटता क्यों अहम?

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कतर, सऊदी अरब और UAE जैसे खाड़ी देश एक साथ अमेरिका के पास पहुंचे। सामान्य तौर पर इन देशों के ईरान को लेकर अलग-अलग रणनीतिक रुख रहे हैं, लेकिन इस बार तीनों देश क्षेत्रीय युद्ध रोकने के लिए एकजुट दिखाई दिए।

दरअसल, पिछले कुछ महीनों से ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर सीधे खाड़ी देशों पर पड़ रहा है। ईरान पहले भी यह आरोप लगा चुका है कि अमेरिकी सहयोगी देश उसके खिलाफ सैन्य गतिविधियों को समर्थन दे रहे हैं। वहीं खाड़ी देशों को डर है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सीधा युद्ध छिड़ता है तो पूरा मध्य पूर्व अस्थिर हो सकता है।

क्या बातचीत से निकल सकता है समाधान?

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ महीनों से लगातार तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच युद्धविराम और परमाणु समझौते को लेकर कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया।

हालांकि ट्रंप के ताजा बयान से संकेत मिल रहे हैं कि खाड़ी देशों की मध्यस्थता के जरिए बातचीत को एक और मौका दिया जा सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीति युद्ध को रोक पाएगी या आने वाले दिनों में मध्य पूर्व फिर बड़े संघर्ष की तरफ बढ़ेगा।

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