
ब्रिटेन की सरकार ने बैंको में साइबर अटैक को रोकने के लिए अहम फैसला लिया है। सरकार ने माइक्रोसॉफ्ट, गूगल क्लाउड, अमेजन वेब सर्विसेज (एडब्लूएस) और ओरेकल जैसे दिग्गज क्लाउड प्रदाताओं पर कड़ी लगाम कस दी है।
ब्रिटेन सरकार ने इन चारों क्लाउड प्रदाताओं को अपनी फाइनेंसियल सिस्टम के लिए 'क्रिटिकल थर्ड पार्टी' घोषित कर दिया है। 13 जुलाई से ये कंपनियां ब्रिटेन के वित्तीय नियामकों के सीधे निगरानी में आ जाएंगी।
ब्रिटेन के नियामक मानते हैं कि आजकल ज्यादातर बैंक और फाइनेंशियल कंपनियां अपना डेटा और सेवाएं इन चार बड़े क्लाउड प्लेटफॉर्म्स पर रखती हैं। अगर इनमें से किसी एक में भी बड़ी समस्या आई तो पूरा सिस्टम हिल सकता है।
इसके चलते एक साथ कई संस्थाएं प्रभावित होंगी, जिससे आम लोगों के पैसे, लेन-देन और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंच सकता है। इन्हीं कारणों को देखते हुए ब्रिटेन सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है।
बता दें की पिछले कुछ सालों में दुनिया भर में क्लाउड आउटेज के कई मामले सामने आ चुके हैं। ब्रिटेन इसे रोकने के लिए पहले से तैयारी कर रहा है। कई मामले सामने आने के बाद सरकार को यह कदम उठाना पड़ा है।
नए नियमों के तहत इन कंपनियों को नियमित रूप से अपनी मजबूती की जांच करानी होगी। नियामक उनसे रिपोर्ट मांग सकेंगे, कोई भी घटना होने पर तुरंत सूचना देनी होगी और जरूरत पड़ी तो सख्त कार्रवाई भी हो सकती है।
ये कदम ब्रिटेन की फाइनेंशियल सिक्योरिटी को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। बता दें कि पहले ये कंपनियां काफी हद तक आजाद थीं, लेकिन अब उन्हें जवाबदेही तय करनी होगी।
भारत में भी बैंकिंग, बीमा और स्टॉक मार्केट बड़े पैमाने पर AWS, Azure और Google Cloud का इस्तेमाल करते हैं। अगर ब्रिटेन जैसे देश सख्त नियम बना रहे हैं तो भविष्य में भारत भी इसी रास्ते पर जा सकता है।
हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और अन्य नियामक पहले से ही क्लाउड रिस्क पर नजर रख रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए बड़ी चिंता की बात नहीं है। वहीं, ब्रिटेन द्वारा उठाए गए कदम पर अभी तक इन कंपनियों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।