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यूक्रेन ने रूस को दहलाया, दो तेल ठिकानों और ट्रेनिंग ग्राउंड पर किए हमले

Russia-Ukraine War: रूस के हमलों का जवाब देते हुए यूक्रेन ने भी सैन्य कार्रवाई की है। यूक्रेनी सेना ने अलग-अलग ठिकानों पर हमले करते हुए रूस को दहला दिया है।
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Oct 07, 2026
Ukraine strike on Russia
यूक्रेन ने रूस पर किया हमला (Photo - Video Screenshot from @ZelenskyyUa)

रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) में अभी भी दोनों पक्षों की तरफ से लगातार हमले किए जा रहे हैं। फिलहाल इस युद्ध के खत्म होने की कोई उम्मीद नहीं है। एक समय था जब रूस ही हमले कर रहा था और यूक्रेन अपनी रक्षा कर रहा था पर अब यूक्रेनी सेना ने भी रूस पर हमले बढ़ा दिए हैं। यूक्रेनी सेना रूस में सैन्य और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना रही है। अब एक बार फिर यूक्रेन ने रूस पर हमले किए, जिसके बारे में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेन्स्की (Volodymyr Zelenskyy) ने जानकारी दी।

दो तेल ठिकानों और ट्रेनिंग ग्राउंड पर किए हमले

ज़ेलेन्स्की ने रूस पर यूक्रेन के हमले का वीडियो शेयर हुए लिखा, "यूक्रेनी सेना ने रूस के हमलों का करारा जवाब दिया है। पिछले एक दिन में यूक्रेनी सेना ने रूस के उस सैन्य अभियान को चलाने और उसके लिए पैसे जुटाने में मदद करने वाले चार ठिकानों पर हमला किया। इनमें पर्म, समारा और अस्त्रखान इलाकों में दो तेल ठिकाने और एक ट्रेनिंग ग्राउंड शामिल हैं। काला सागर में भी यूक्रेन ने जवाबी कार्रवाई की।"

मज़बूत एयर डिफेंस चाहते हैं ज़ेलेन्स्की

ज़ेलेन्स्की ने एक बार फिर मज़बूत एयर डिफेंस की इच्छा जताई। उन्होंने बताया कि रूसी बैलिस्टिक मिसाइलें यूक्रेन के लिए लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं और इस समय यूक्रेन के लिए एयर डिफेंस पैकेज बहुत ज़रूरी हैं। ज़ेलेन्स्की ने बताया कि यूक्रेन हर दिन पैट्रियट सिस्टम के लिए मिसाइलें ढूंढ रहा है, जिससे न सिर्फ रूसी हमलों को नाकाम किया जा सके, बल्कि यूक्रेनी लोगों की जान भी बचाई जा सके। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रूसी हवाई हमलों के खिलाफ यूक्रेन को मज़बूत एयर डिफेंस की ज़रूरत है और इस सिलसिले में ज़ेलेन्स्की अपने सहयोगी देशों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।

ऊर्जा ठिकानों पर हमले क्यों?

रूस के ऊर्जा ठिकाने न सिर्फ उसकी सैन्य क्षमता में, बल्कि उसकी अर्थव्यवस्था में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसी वजह से यूक्रेन अब रूसी ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना रहा है, जिससे रूस की सैन्य क्षमता के साथ ही अर्थव्यवस्था को भी चोट पहुंचाई जा सके। इससे न सिर्फ रूस में डीज़ल सप्लाई पर, बल्कि वैश्विक डीज़ल सप्लाई पर भी असर पड़ा है।