Ukrainian PM's Request For India And PM Modi: यूक्रेन के पीएम ने हाल ही में भारत और पीएम नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगाई है। क्या है यह गुहार? आइए जानते हैं।
रूस (Russia) और यूक्रेन (Ukraine) के बीच चल रहे युद्ध को 23 महीने पूरे हो चुके हैं और 24 फरवरी को इसे 2 साल पूरे हो जाएंगे। हालांकि अभी भी यह युद्ध रुका नहीं है। हालांकि युद्ध की गति में पहले के मुकाबले धीमापन देखने को मिला है। इस युद्ध की वजह से यूक्रेन में जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। साथ ही कई शहरों में भी भीषण तबाही मची है। हालांकि लगातार मिले इंटरनेशनल सपोर्ट की वजह से यूक्रेन ने लगातार डटकर रूस का सामना किया। इसी बीच यूक्रेन के पीएम डेनिस शमीहाल (Denys Shmyhal) ने भारत (India) के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की तारीफ करने के साथ ही मदद की गुहार भी लगाई है।
पीएम मोदी हैं ग्लोबल लीडर
भारत को 75वें गणतंत्र दिवस की बधाई देते हुए डेनिस ने पीएम मोदी की भी तारीफ की। डेनिस ने पीएम मोदी को ग्लोबल लीडर बताया और कहा कि वह वैश्विक शांति के लिए बेहतरीन काम कर रहे हैं।
लगाई मदद की गुहार
पीएम मोदी की तारीफ के साथ ही डेनिस ने भारत से मदद की गुहार भी लगाई। डेनिस ने पीएम मोदी से अनुरोध किया कि उन्हें भारत और यूक्रेन के बीच व्यापार को बढ़ावा देना चाहिए जिससे यूक्रेन की अर्थव्यवस्था वापस से पटरी पर आ सके। डेनिस ने यह भी कहा कि युद्धग्रस्त यूक्रेन के एक बड़े हिस्से में अब शांति है और ऐसे में भारत को फिर से अपने स्टूडेंट्स को पढ़ने के लिए यूक्रेन भेजना चाहिए।
यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को भारतीय मदद की है ज़रूरत
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रूस के खिलाफ चल रहे युद्ध की वजह से यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है। इसी वजह से यूक्रेनी पीएम ने भारतीय पीएम से मदद की गुहार लगाई है। युद्ध से पहले हज़ारों भारतीय स्टूडेंट्स यूक्रेन में पढ़ते थे। पर युद्ध शुरू होने की वजह से सभी यूक्रेन में फंस गए। फंसे हुए सभी भारतीय स्टूडेंट्स के साथ अन्य भारतीयों को निकालने के लिए भारत सरकार ने 'ऑपरेशन गंगा' चलाया था जिससे यूक्रेन में फंसे सभी भारतीयों को भारत वापस लाया गया। इतना ही नहीं, भारत सरकार ने तो कुछ अन्य देशों के नागरिकों को भी यूक्रेन से बाहर निकाला था। अब यूक्रेन चाहता है कि भारतीय स्टूडेंट्स फिर से पढ़ने के लिए यूक्रेन आए और साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार भी शुरू हो सके जिससे यूक्रेन की अर्थव्यवस्था पटरी पर आ सके।
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