
अमेरिका (United States of America) ने ईरान (Iran) पर लगातार 13 रात हमले करने के बाद अब अपनी सैन्य कार्रवाई पर रोक लगा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच फिर से सीज़फायर लागू हो, शांति समझौता फिर से प्रभाव में आए और एक बार फिर बातचीत शुरू हो, जिससे कूटनीति के ज़रिए तनाव कम किया जा सके। जब अमेरिका ईरान पर हमले कर रहा था, तब ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले किए। इन हमलों के बारे में एक बड़ा दावा सामने आया है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेन्स्की (Volodymyr Zelenskyy) ने दावा किया है कि मिडिल ईस्ट में हमलों के लिए रूस की तरफ से ईरान की मदद की जा रही है। ज़ेलेन्स्की ने रूस पर सीधे तौर पर मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर हमलों के लिए ईरान की मदद करने का आरोप लगाया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति का कहना है कि रूस की तरफ से मिडिल ईस्ट में अपने सैटेलाइट से ली गई जानकारी ईरान को दी जा रही है। रूस ऐसा इसलिए कर रहा है जिससे ईरान मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर सटीक हमले कर सके।
ज़ेलेन्स्की ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "जुलाई की शुरुआत से ही यूक्रेन ने मिडिल ईस्ट देशों और वहाँ मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर रूस के सैटेलाइट की सक्रिय निगरानी देखी है। ये तस्वीरें बाद में ईरान में दिखाई देती हैं। साथ ही इन जगहों की रूसी सैटेलाइट तस्वीरों और ईरान के हमलों के बीच एक साफ़ संबंध दिखता है। हमले से पहले उनकी तैयारी के दौरान और हमले के बाद हुए नुकसान का अंदाज़ा लगाने के लिए भी। सिर्फ 19 और 20 जुलाई को 4 एयर बेस रूसी सैटेलाइट की नज़र में आए। दो बहरीन में, एक जॉर्डन में और एक कुवैत में। मकसद साफ है। दुनिया में किसी को भी एक बहुत सीधी सी बात से आँआंखें नहीं मूंदनी चाहिए। बुराई हमेशा हालात को और खराब करने और फैलने के तरीके ढूंढती है। रूस को रोकना होगा। इस युद्ध को रोकना होगा। हमलावर पर दबाव का असर होना चाहिए।