UNHRC : भारत ने पाकिस्तान की बोलती बंद कर दी है। फर्स्ट सेक्रेटरी अनुपमा सिंह ने दुनिया को बताया कि जम्मू-कश्मीर का विकास बजट पाकिस्तान के पूरे IMF बेलआउट पैकेज से भी बड़ा है।
Diplomacy: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के मंच पर भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को करारा कूटनीतिक तमाचा जड़ा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमेशा कश्मीर का झूठा रोना रोने वाले दुश्मन मुल्क को भारत ने इस बार उसी की आर्थिक बदहाली का आईना दिखा दिया है। भारत ने दुनिया के सामने दो-टूक शब्दों में साफ कर दिया कि आज जम्मू-कश्मीर (Jammu And Kashmir) का कुल विकास बजट, कंगाल हो चुके पाकिस्तान को मिलने वाले पूरे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष बेलआउट पैकेज (IMF Bailout) से भी कहीं ज्यादा बड़ा है। विकास की यह जमीनी हकीकत सुनकर वहां मौजूद पाकिस्तानी राजनयिकों के चेहरे उतर गए और उनकी बोलती पूरी तरह बंद हो गई।
यह पूरा वाकया तब हुआ जब पाकिस्तान ने इस्लामिक सहयोग संगठन ( OIC ) की आड़ लेकर कश्मीर को लेकर अपनी पुरानी आदत के अनुसार बेबुनियाद और झूठे आरोप लगाए। इसके बाद भारत की ओर से फर्स्ट सेक्रेटरी अनुपमा सिंह ने मोर्चा संभाला। उन्होंने जवाबी कार्रवाई ( Right to reply) के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के एक-एक झूठ की बखिया उधेड़ दी। उन्होंने साफ किया कि जो देश आतंकवाद की फैक्ट्री चलाता है, उसे मानवाधिकारों पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
अनुपमा सिंह ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर में हो रहे ऐतिहासिक विकास कार्यों के ठोस आंकड़े पेश किए। जब उन्होंने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल 'चिनाब ब्रिज' और वहां चल रहे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का जिक्र किया, तो पूरी दुनिया ने भारत की तरक्की का लोहा माना। उन्होंने साफ किया कि भारत अपने नागरिकों की भलाई और विकास पर जो खर्च कर रहा है, वह पाकिस्तान की कुल कर्ज मांगने की क्षमता से भी अधिक है।
भारत की ओर से ठोस आर्थिक आंकड़े और विकास का मॉडल पेश करने के बाद UNHRC के हॉल में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल सरेआम निरुत्तर हो गया। उनके पास भारत के तर्कों का कोई काट नहीं था और न ही उनकी तरफ से कोई जवाबी प्रतिक्रिया आई। वहीं, वैश्विक राजनयिक हलकों में भारत के इस बेबाक और आक्रामक रुख की जमकर तारीफ हो रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश गया है कि भारत अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि तथ्यों के साथ आक्रामक कूटनीति कर रहा है।
इस करारी कूटनीतिक हार के बाद पाकिस्तान वैश्विक मंचों पर और अलग-थलग पड़ गया है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत अब इस मामले को यहीं नहीं छोड़ेगा। आने वाले अन्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भी भारत, पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद और उसके आर्थिक दिवालियापन के मुद्दे को इसी तरह प्रमुखता से उठाएगा। पाकिस्तान पर अपनी जमीन से आतंकवाद खत्म करने का वैश्विक दबाव और ज्यादा बढ़ने वाला है।
बहरहाल, इस खबर का सबसे अहम पहलू पाकिस्तान का वह दोहरा चरित्र है, जिसे भारत ने बेनकाब किया है। एक तरफ पाकिस्तानी अवाम आटा, बिजली और पेट्रोल के लिए मोहताज है। वहां की सरकार IMF से कर्ज की अगली किस्तों के लिए गिड़गिड़ा रही है। वहीं दूसरी तरफ, पाकिस्तानी हुक्मरान अपनी अवाम का ध्यान भटकाने के लिए UN जैसे मंचों पर कश्मीर का राग अलाप रहे हैं। भारत ने यह बता दिया है कि पाकिस्तान का फोकस विकास पर नहीं, बल्कि सिर्फ प्रोपेगेंडा और आतंकवाद पर है।