
पाकिस्तान में तेल संकट। ( फोटो: AI Generated)
Inaction: पाकिस्तान का ऊर्जा क्षेत्र इस समय एक बड़े संकट से गुजर रहा है। तेल कंपनियों की सलाहकार परिषद (OCAC) ने पाकिस्तान के तेल नियामक 'ओजीआरए' (OGRA) की कड़ी आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि सरकार की ढुलमुल नीतियों के कारण देश का तेल उद्योग ठप होने के कगार पर है। मुख्य विवाद तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के लाभ मार्जिन को लेकर है। पिछले दो सालों से कंपनियों का मार्जिन स्थिर है, जबकि परिचालन लागत और मुद्रास्फीति आसमान छू रही है।
जहां एक ओर भारत अपनी तेल कंपनियों को वैश्विक उतार-चढ़ाव के बीच स्थिरता देने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और डिजिटल सुधारों पर निवेश कर रहा है, वहीं पाकिस्तान में सरकारी फैसले फाइलों में दबे हुए हैं। भारत ने हाल के बरसों में अपनी तेल कंपनियों (जैसे IOCL, BPCL) को आत्मनिर्भर बनाने और हरित ऊर्जा की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया है, जबकि पाकिस्तान में कंपनियां बुनियादी मार्जिन वृद्धि के लिए भी तरस रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान ने भारत की तरह नियामक स्पष्टता नहीं दिखाई, तो वहां ईंधन की भारी किल्लत हो सकती है।
पाकिस्तानी आर्थिक समन्वय समिति (ECC) ने तेल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी, लेकिन संघीय मंत्रिमंडल ने एक नई शर्त थोप दी है। अब कंपनियों को मार्जिन वृद्धि तभी मिलेगी, जब वे 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण का लक्ष्य पूरा कर लेंगी। ओसीएसी का तर्क है कि वित्तीय सहायता और पुराने निवेशों की वसूली के बिना नया डिजिटल ढांचा खड़ा करना असंभव है। उद्योग ने एक "डिजिटलीकरण कोष" बनाने का प्रस्ताव दिया है, जो वैधानिक करों की तरह काम करे और निवेश की प्रतिपूर्ति सुनिश्चित करे।
पाकिस्तानी तेल क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार "डिजिटलीकरण" को एक बहाने के तौर पर इस्तेमाल कर रही है ताकि उसे मार्जिन न बढ़ाना पड़े। ओएमसी कंपनियों ने साफ कर दिया है कि यदि ऑटो टैंक गेजिंग (ATG) और ट्रैक-एंड-ट्रेस सिस्टम जैसे पुराने निवेशों की भरपाई नहीं हुई, तो वे भविष्य में निवेश बंद कर देंगी।
यदि ओजीआरए और पेट्रोलियम मंत्रालय ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, तो पाकिस्तान के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर तालाबंदी की नौबत आ सकती है। उद्योग ने 2030 तक के लिए एक रिकवरी तंत्र का सुझाव दिया है। भारत के ऊर्जा विशेषज्ञ इस पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि पड़ोसी देश में ऊर्जा संकट का असर दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
यह केवल तेल का मामला नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की समग्र आर्थिक विफलता दर्शाता है। विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और आईएमएफ (IMF) की कड़ी शर्तों के बीच, शहबाज शरीफ सरकार जनता पर बोझ डालने से डर रही है और कंपनियों को घाटे में धकेल रही है। तुलनात्मक रूप से देखें तो भारत का गतिशील मूल्य निर्धारण तंत्र (Dynamic Pricing) अधिक सफल साबित हुआ है। ( इनपुट : ANI)
Updated on:
16 Jan 2026 05:04 pm
Published on:
16 Jan 2026 05:03 pm
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