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होर्मुज संकट पर वैश्विक हलचल तेजः अंतरराष्ट्रीय समर्थन बढ़ा, आज सुरक्षा परिषद की आपात बैठक संभव

US Iran tension: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद होर्मुज स्ट्रेट को लेकर आपात बैठक बुला सकती है, जहां अमेरिका और बहरीन द्वारा पेश प्रस्ताव पर चर्चा होगी।
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May 19, 2026
UNSC emergency meeting on Middle East crisis.
होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी सैनिक। (File Photo - IANS)

UNSC emergency meeting on Hormuz Strait: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) आज मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट को लेकर एक आपात बैठक बुला सकती है। इसकी वजह यह है कि इस क्षेत्र को लेकर लाए गए एक प्रस्ताव को अब तेजी से समर्थन मिल रहा है। बहरीन और अमेरिका द्वारा पेश किए गए इस मसौदे को अब तक 129 से ज्यादा देशों का समर्थन मिल चुका है। एक हफ्ते पहले तक यह संख्या करीब 112 थी।

हाल ही में सोमालिया और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो भी इस प्रस्ताव के सह-प्रायोजक बन गए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ये दोनों देश इस समय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के चुने हुए सदस्य भी हैं, इसलिए इनके समर्थन को काफी अहम माना जा रहा है।

क्या है प्रस्ताव का मकसद?

इस प्रस्ताव का मकसद होर्मुज स्ट्रेट में सभी देशों के जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित और बिना रुकावट बनाए रखना है। साथ ही, यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करने, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने पर भी जोर देता है। कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत भी इस प्रस्ताव के प्रमुख समर्थकों में शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई में स्थित कुछ परमाणु ठिकानों पर हाल ही में ड्रोन हमले हुए थे। इसके बाद बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र से इस मुद्दे पर तुरंत बैठक बुलाने की मांग की है। माना जा रहा है कि सुरक्षा परिषद के सदस्य इस पूरे घटनाक्रम पर करीब से नजर रखेंगे।

इससे पहले 6 मई को अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में यह प्रस्ताव पेश किया था। इसका उद्देश्य इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को सुरक्षित रखना और ईरान व अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को बिना बाधा के जारी रखना है।

'ईरान कर रहा दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित'

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि ईरान इस समुद्री रास्ते में तनाव पैदा कर दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान जहाजों पर हमले, समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने और जहाजों से शुल्क वसूलने जैसी गतिविधियों में शामिल है।

यह प्रस्ताव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिका और खाड़ी देशों के सहयोग से तैयार किया गया है। इसमें ईरान से ऐसे सभी कदम रोकने और पहले से बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों की जानकारी साझा करने की मांग की गई है। साथ ही मानवीय सहायता के लिए सुरक्षित समुद्री गलियारे बनाने की बात भी शामिल है।

ईरान ने प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की

दूसरी तरफ, ईरान ने इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की है। ईरान का कहना है कि अमेरिका अपने राजनीतिक हित साधने के लिए यह कदम उठा रहा है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी मिशन ने कहा कि यह प्रस्तावित मसौदा इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग में चल रहे संकट को सुलझाने में मदद नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट का एकमात्र व्यावहारिक समाधान ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाना है।

अमेरिका ने टाली सैन्य कार्रवाई

इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान पर सैन्य कार्रवाई की योजना को फिलहाल रोक दिया गया है। उन्होंने बताया कि कई देशों के अनुरोध पर यह फैसला लिया गया है, क्योंकि बातचीत के जरिए समझौते की उम्मीद अभी बाकी है।

हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। वॉशिंगटन का कहना है कि वह बातचीत के जरिए समाधान चाहता है, लेकिन ईरान की ओर से सहयोग न मिलने से स्थिति जटिल बनी हुई है।

Updated on:
19 May 2026 10:27 am
Published on:
19 May 2026 10:27 am