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वैश्विक बदलावों के बीच UNSC सुधार जरूरी, एंतोनियो गुटेरेस का बयान भारत के लिए क्यों है अहम

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद में सुधारों को 'अनिवार्य' बताकर हलचल तेज कर दी है। विशेषाधिकारों से चिपके देशों को उनकी चेतावनी भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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Jan 20, 2026
Antonio Guterres
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस (Photo - IANS)

UNSC Reforms 2026: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने एक बार फिर सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में व्यापक सुधार की जोरदार वकालत करते हुए इसे केवल जरूरी नहीं, बल्कि अनिवार्य बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि जो देश आज अपने विशेषाधिकारों से चिपके रहने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें भविष्य में इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

गुटेरेस ने स्पष्ट किया कि वैश्विक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को भी साहसिक बदलाव करने होंगे। वर्तमान में सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य—अमरीका, चीन, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन—हैं, जिनके पास वीटो अधिकार है, जबकि 10 गैर-स्थायी सदस्य दो वर्ष के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं।

गुटेरेस का यह बयान ऐसे समय आया है, जब लंबे समय से परिषद की संरचना को आधुनिक वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने की मांग तेज होती जा रही है। उनका कहना है कि यदि संयुक्त राष्ट्र को प्रभावी और प्रासंगिक बनाए रखना है, तो सुरक्षा परिषद में सुधार टालने का विकल्प नहीं है।

भारत के लिए सुधार के क्या मायने?

भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है, हालांकि वह अभी स्थायी सदस्य नहीं है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 2024 में संसद में कहा था कि भारत इस लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और सुरक्षा परिषद में सुधार के तहत स्थायी सदस्य बनने की पूरी पात्रता रखता है। गुटेरेस और संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टेफान दुजारिक भी भारत को यूएन प्रणाली का अहम हिस्सा बता चुके हैं। रूस, अमरीका, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देश भी भारत की दावेदारी का समर्थन कर चुके हैं। भारत 2021-22 में गैर-स्थायी सदस्य रहा और अब भी परिषद सुधार के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

Updated on:
20 Jan 2026 03:33 am
Published on:
20 Jan 2026 03:33 am