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परमाणु बम से एक कदम दूर ईरान? खुफिया जानकारी देने वालों को अमेरिका देगा 20 मिलियन डॉलर

अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी देने वालों के लिए 20 मिलियन डॉलर तक के इनाम की घोषणा की है। इसमें वैज्ञानिकों, परमाणु ठिकानों, उपकरणों और तकनीकों से संबंधित जानकारी शामिल है। IAEA के मुताबिक, ईरान 60 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धित कर रहा था।
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Updated: 7 Nov 2026, 6:51 AM IST
Iran Nuclear Program
Iran Nuclear Program (File Photo/ANI)

Iran Nuclear Program: अमेरिकी विदेश विभाग के रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस कार्यक्रम ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम की खुफिया जानकारी पता लगाने के लिए एक बड़े इनाम की घोषणा की है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में सटीक जानकारी देने पर 20 मिलियन डॉलर (लगभग 188 करोड़ रुपये) तक का इनाम दे रहा है। इसमें ईरान के वैज्ञानिकों, कर्मचारियों, सुविधाओं, संबंधित तकनीकों, संवेदनशील उपकरणों और इन सामग्रियों की आवाजाही के बारे में जानकारी शामिल है।

सुरक्षित देशों में बसाने का भी प्रावधान

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जारी एक बयान में अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि अमेरिकी सरकार किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जारी बयान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो लोग ऐसी जानकारी देंगे, उन्हें और उनके परिवारों को नकद इनाम के साथ-साथ संभावित खतरों से बचाने के लिए सुरक्षित देशों में बसाया जाएगा।

ईरान 60 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धित कर चुका है

अमेरिका ने यह इनाम इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) की हालिया चेतावनियों के बाद घोषित किया है। रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस के बयान में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था (IAEA) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान यूरेनियम को 60 प्रतिशत शुद्धता स्तर तक संवर्धित कर रहा है। तकनीकी रूप से यह 60 प्रतिशत का स्तर हथियार बनाने के लिए जरूरी 90 प्रतिशत संवर्धन (वेपन्स-ग्रेड यूरेनियम) से बस कुछ ही कदम दूर है।

ईरान दुनिया का इकलौता ऐसा देश बन गया है जिसके पास परमाणु हथियार तो नहीं हैं, लेकिन फिर भी वह इतने उच्च स्तर तक यूरेनियम का संवर्धन कर रहा है। रक्षा और परमाणु विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर इस संवर्धित भंडार को और अधिक रिफाइन किया जाए, तो इससे कई परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं।

IAEA के पास सेंट्रीफ्यूज के बारे में पूरा डेटा नहीं है

अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए मुख्य चिंता यह है कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय निगरानी नियमों और सुरक्षा दायित्वों का पालन करना लगभग बंद कर दिया है। इस वजह से IAEA की कंटिन्यूइटी ऑफ नॉलेज यानी ईरान की परमाणु गतिविधियों का लगातार और बिना किसी रुकावट के रिकॉर्ड रखने की क्षमता प्रभावित हुई है।

एजेंसी अब यह सटीक रूप से पता लगाने में असमर्थ है कि ईरान किस तरह के उन्नत सेंट्रीफ्यूज बना रहा है, उन्हें कहां रखा जा रहा है या गुप्त भूमिगत बंकरों में कितनी मात्रा में यूरेनियम प्रोसेस किया जा रहा है। यही कारण है कि अमेरिका अब तकनीकी विशेषज्ञों, प्रयोगशाला वैज्ञानिकों और इससे जुड़ी लॉजिस्टिक्स से जुड़े लोगों को सीधे वित्तीय प्रलोभन और सुरक्षित भविष्य का विकल्प देकर खुफिया जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है।

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7 Nov 2026, 6:51 AM IST
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