ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच तनाव बरकरार है। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी सेना ने ईरान के केशम आइलैंड (Qeshm Island) पर सीमित हमले किए थे। मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने बुधवार और गुरुवार को अपनी नेशनल सिक्योरिटी टीम से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि इस दौरान ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अगले कदम पर चर्चा की। इसी बीच आज ईरानी को अमेरिका के खिलाफ कामयाबी मिली है।
ईरानी सेना ने मार गिराया अमेरिकी ड्रोन
ईरान की आईआरजीसी - इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC - Islamic Revolutionary Guard Corps) ने जानकारी दी कि उनकी सेना ने अमेरिकी सेना के एक MQ-1 ड्रोन को मार गिराया है। इस ड्रोन को केशम आइलैंड के पास मार गिराया गया। जानकारी के अनुसार इस ड्रोन को मार गिराने के लिए आईआरजीसी ने अपने नए एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया, जो ईरान के यूनिफाइड एयर डिफेंस नेटवर्क के तहत इस्तेमाल किया जा रहा है।
16वां अमेरिकी MQ-1 ड्रोन जिसे ईरान ने मार गिराया
आज आईआरजीसी द्वारा मार गिराया गया MQ-1 ड्रोन इस तरह का 16वां ड्रोन है, जिसे ईरान ने मार गिराया है। अमेरिकी सेना ने 2018 में ही MQ-1 ड्रोन को सेवानिवृत्त कर दिया था। हालांकि ईरान समेत कुछ देशों में अपनी सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिका अभी भी इस ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है।
कितनी है MQ-1 ड्रोन की कीमत?
यूं तो अमेरिकी सेना द्वारा MQ-1 ड्रोन को 2018 में सेवानिवृत्त किया जा चुका है, लेकिन सेवानिवृत्त किए जाने से पहले इस एक ड्रोन की लागत करीब 4-5 मिलियन अमेरिकी डॉलर थी। पूरे सिस्टम की लागत लगभग 20 मिलियन डॉलर थी। इसमें चार एयरक्राफ्ट्स, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और सैटेलाइट लिंक शामिल हैं।
क्या है इस ड्रोन की उपयोगिता?
MQ-1 ड्रोन का मुख्य रूप से खुफिया, निगरानी, टोही और हल्के हमले के लिए इस्तेमाल किया जाता है और इसी वजह से ईरान में इसका अभी भी इस्तेमाल किया जा रहा है। यह एक मध्यम ऊंचाई वाला मानव रहित UAV है, जिसे ईरान में अहम जगहों पर इस्तेमाल किया जा रहा है।