US-Iran Talks: अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में पहले दौर की शांति-वार्ता के बाद अब तक सीधी बातचीत नहीं हुई है। हालांकि अब एक बार फिर दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत शुरू होने वाली है।
ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच तनाव बना हुआ है, लेकिन पाकिस्तान (Pakistan) के ज़रिए बातचीत भी जारी है। शुक्रवार को होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में ईरान ने अमेरिकी डिस्ट्रॉयर को निशाना बनाते हुए मिसाइल दागी। इसके बाद अमेरिका ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के केशम पोर्ट और बंदर अब्बास शहर पर हमला किया। सीज़फायर के इस उल्लंघन के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि दोनों देशों के बीच सीज़फायर और बातचीत अभी भी जारी है। कुछ घंटों पहले भी अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में 2 ईरानी जहाजों पर गोलीबारी की। हालांकि इसी बीच अब दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत से जुड़ा बड़ा अपडेट सामने आया है।
अमेरिकी मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार इस मामले से परिचित लोगों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच अगले हफ्ते फिर से सीधी बातचीत शुरू होगी। यह बातचीत पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हो सकती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान मध्यस्थ का काम कर रहा है और सीज़फायर में भी पाकिस्तान की भूमिका रही थी, जिसके लिए ट्रंप ने पाकिस्तानी पीएम शहबाज़ शरीफ (Shehbaz Sharif) और आर्मी चीफ आसिम मुनीर (Asim Munir) को क्रेडिट भी दिया था।
अमेरिका ने पाकिस्तान के ज़रिए ईरान को 14 सूत्रीय समझौता प्रस्ताव भेजा है। इस समझौता प्रस्ताव का उद्देश्य युद्ध को समाप्त करने के लिए एक महीने तक चलने वाली शांति-वार्ता प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार करना है। इस समझौता प्रस्ताव में ईरान के परमाणु प्रोग्राम, होर्मुज स्ट्रेट में तनाव कम करने और उसे सभी के लिए खोलने, ईरान के यूरेनियम भंडार को किसी अन्य देश में स्थानांतरित करने की संभावित व्यवस्थाओं को शामिल किया गया है। हालांकि दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। अमेरिका के इस प्रस्ताव पर ईरान विचार कर रहा है। ईरान भी चाहता है कि उस पर लगाए हुए प्रतिबंधों को हटाया जाए। हालांकि परमाणु प्रोग्राम को पूरी तरह से खत्म करने और यूरेनियम भंडार को किसी दूसरे देश में स्थानांतरित करने पर बात अटक सकती है। गौरतलब है कि ईरान के यूरेनियम भंडार को लेने के लिए रूस (Russia) प्रस्ताव पेश कर चुका है।