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AI Agents in Banking: जब बैंक खातों में खुद-ब-खुद काम करने लगे एआई: अमेरिकी बैंकिंग क्षेत्र में मचा हड़कंप, कड़े प्रतिबंध लागू

US Banks AI Security: बैंकिंग प्रणाली में 'रॉग' एआई एजेंट्स की अनधिकृत गतिविधियों ने अमेरिकी वॉल स्ट्रीट को हिलाकर रख दिया है।
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Updated: 23 Oct 2026, 10:10 AM IST
AI Agents in Banking
AI Agents in Banking : अमेरिकी बैंकों का बड़ा एक्शन! AI एजेंट्स की एंट्री पर लगाई रोक (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

US Banks AI Security: अमेरिका के बड़े वित्तीय संस्थान अब अपने ग्राहकों के खातों पर बाहरी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एजेंट्स की घुसपैठ रोकने के लिए सुरक्षा घेरा लगातार मजबूत कर रहे हैं। जेपीमॉर्गन चेस, मॉर्गन स्टेनली, बैंक ऑफ अमेरिका और वेल्स फार्गो जैसे बैंक उन थर्ड-पार्टी एआई टूल्स को ब्लॉक कर रहे हैं, जो बिना इंसानी निर्देशों के खुद-ब-खुद लेन-देन की कोशिश कर रहे थे।

US Banks AI Security: ग्राहकों ने AI ऐप्स को दिए लॉगिन डिटेल्स, बढ़ा सुरक्षा का खतरा

असल दिक्कत तब शुरू हुई, जब ढेर सारे ग्राहकों ने स्मार्टनेस के चक्कर में अपनी लॉगिन आईडी और पासवर्ड अलग-अलग एआई ऐप्स को दे डाले। ऐसे एआई एजेंट्स ने खातों में घुसकर जब मनमानी फैसले लेने शुरू किए, तो बैंकिंग सिस्टम में तुरंत खतरे की घंटियां बज गईं। जेपीमॉर्गन के सीईओ जेमी डाइमॉन ने साफ सब्दों में कहा-बैंक कभी भी बाहरी एआई टूल्स को अपने सिस्टम में खुला प्रवेश नहीं देगा, क्योंकि ये ग्राहकों और खुद बैंक दोनों के लिए बड़ा खतरा हैं।

JPMorgan AI Agents: मॉर्गन स्टेनली ने थर्ड-पार्टी AI एजेंट्स को किया ब्लॉक

मॉर्गन स्टैनली ने तो अपने प्लेटफॉर्म से तीसरे पक्ष के एजेंट्स को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, बैंक को अब तक किसी खास नुकसान या हैक का मामला नहीं मिला है। जेपीमॉर्गन चेस, बैंक ऑफ अमेरिका और वेल्स फार्गो भी इसी राह पर हैं। हैरानी की बात ये है कि कई बार ग्राहक खुद ही अपने लॉगिन डिटेल्स ऐसे टूल्स को सौंप देते हैं, और फिर जब कोई गड़बड़ लेन-देन होता है तो बैंक उसे पहचानकर रोक देता है। अगर ग्राहक ने खुद इजाजत दी है, तो तकनीकी तौर पर इसे अनधिकृत मानना भी आसान नहीं है।

Third Party AI Tools: बाहरी AI एजेंट्स को लेकर बैंकों का सख्त रुख

डाइमॉन ने फिर दोहराया कि बैंक में बाहरी एजेंट को घुसने नहीं देंगे, चाहे कुछ भी हो। बैंक अब अपनी खुद की टेक्नोलॉजी विकसित कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसे खतरों को समय रहते रोका जा सके। इसी तरह, चार्ल्स श्वाब के सीईओ रिचर्ड वुस्टर भी लगातार रिपोर्ट देख रहे हैं कि कितनी बार ऐसे एजेंट्स को ब्लॉक करना पड़ा। वे मानते हैं कि ग्राहक की पहचान और हर ट्रांजैक्शन का नियंत्रण सिर्फ बैंक के पास रहना चाहिए।

US Banks AI Security: अमेरिका से लेकर दुनिया भर में बढ़ रही AI एजेंट्स को लेकर चिंता

ये समस्या सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है। दुनियाभर में एआई एजेंट्स के इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ रही है। हाल ही में अमेज़न और डेल्टा जैसी कंपनियों ने भी अपने सिस्टम में एआई एजेंट्स पर रोक लगाई है। बैंक ऑफ इंग्लैंड और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी बड़ी संस्थाएं भी चेतावनी दे चुकी हैं कि ये स्वायत्त सिस्टम मार्केट में उथल-पुथल मचा सकते हैं। अमेरिका के रेगुलेटर्स, जैसे फेडरल रिजर्व, अब बैंकों से पूछ रहे हैं। आप इन एजेंट्स पर कितना नियंत्रण रख पा रहे हैं?

बैंकों का नया तरीका: AI एजेंट्स को सिर्फ जानकारी देखने की अनुमति

अब कुछ बैंक रीड-ओनली एक्सेस की तरफ बढ़ रहे हैं, ताकि एजेंट सिर्फ जानकारी देख सकें, पैसे ट्रांसफर या भुगतान न कर पाए। असली सवाल जिम्मेदारी का है: अगर कोई एआई एजेंट गलती से गड़बड़ ट्रांजैक्शन कर देता है तो जिम्मेदार कौन, ग्राहक, बैंक या एआई कंपनी?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि आगे चलकर एआई एजेंट्स बेशक बैंकिंग को आसान बना सकते हैं, लेकिन इस वक्त सुरक्षा सबसे ऊपर है। ग्राहकों को साफ सलाह दी जा रही है। अपनी लॉगिन डिटेल्स किसी भी स्वायत्त सॉफ्टवेयर के साथ शेयर मत करो। रॉयटर्स और एक्सियोस की रिपोर्टों से साफ है कि बैंक अब एआई की ताकत और उसके खतरे, दोनों को लेकर काफी सतर्क होते जा रहे हैं। भरोसेमंद बैंकिंग के लिए यही फिलहाल सबसे जरूरी कदम है।

Updated on:
23 Oct 2026, 10:10 AM IST
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