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US Strikes: वेनेजुएला के बाद अमेरिका ने देर रात इस देश पर कर दिया स्ट्राइक, 90 से ज्यादा बम दागे, धुआं-धुआं हुआ इलाका

अमेरिका ने सीरिया में ISIS के ठिकानों पर बड़े हमले किए हैं। अमेरिकी सेना ने 'ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक' के तहत ये हमले किए।

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Jan 11, 2026
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (फोटो- IANS)

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक्शन मोड में हैं। उनके आदेश पर अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के बाद एक और देश पर देर स्ट्राइक कर दिया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की सेनाओं ने 'ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक' के तहत पूरे सीरिया में ISIS के कई ठिकानों पर बड़े हमले किए।

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रात 10:30 बजे हुआ हमला

CENTCOM ने अपने एक्स पर डिटेल्स शेयर करते हुए बताया कि हमले अमेरिकी समय के अनुसार दोपहर लगभग 12:30 बजे (रात 10:30 बजे भारतीय समय) किए गए। ये हमले ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक का हिस्सा थे।

अमेरिकी सेना ने कहा कि इन हमलों का मुख्य मकसद इस्लामिक आतंकवाद को जड़ से खत्म करना है। इसके अलावा, एक और मकसद ISIS को खत्म करना है, ताकि भविष्य में उनके हमले न हों और अमेरिकी सैनिक व सीरिया के लोग सुरक्षित रहें।

ट्रंप के आदेश पर शुरू हुआ ऑपरेशन

अमेरिकी सेना और उनके साथी देश उन आतंकवादियों को जड़ से उखाड़ फेकेंगे, जो अमेरिका को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। CENTCOM ने अपनी पोस्ट में यह भी बताया कि ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक 19 दिसंबर, 2025 को अमेरकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के कहने पर शुरू किया गया था।

यह 13 दिसंबर, 2025 को सीरिया के पल्मायरा में अमेरिकी और सीरियाई सेना पर ISIS के हमले का सीधा जवाब था। CENTCOM ने कहा कि यह हमला ISIS आतंकवादियों ने किया था और इसमें दो अमेरिकी सैनिक और एक अमेरिकी सिविलियन इंटरप्रेटर की जान चली गई थी।

अमेरिकी सेना ने कहा- हमारा मैसेज मजबूत है

पोस्ट में कहा गया- हमारा मैसेज मजबूत है। अगर आप हमारे सैनिकों को नुकसान पहुंचाते हैं, तो हम आपको दुनिया में कहीं भी ढूढ़कर मार डालेंगे, चाहे आप इंसाफ से बचने की कितनी भी कोशिश करें।

35 से ज्यादा ठिकानों को बनाया गया निशाना

एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि शनिवार के ऑपरेशन में 35 से ज्यादा टारगेट पर निशाना साधने के लिए 90 से अधिक बम दागे गए, जिसमें दो दर्जन से ज्यादा एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया गया।

बता दें कि इस साल की शुरुआत में, अमेरिका ने ISIS को हराने के लिए ऑपरेशन इनहेरेंट रिज़ॉल्व के तहत मध्य पूर्व में लगभग 1,800 सैनिक भेजे थे।

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