Drone-Strike: इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर बुधवार तड़के एक सीधा ड्रोन हमला हुआ है। घटना के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
Baghdad: इराक की राजधानी बगदाद (Baghdad) में बुधवार सुबह एक बड़ी घटना सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। यहां स्थित अमेरिकी दूतावास (US Embassy) को निशाना बनाते हुए एक बड़ा ड्रोन हमला (Drone Attack) किया गया है। मीडिया रिपोटर्स के अनुसार एक सुरक्षा सूत्र ने इस गंभीर हमले की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि एक हथियारबंद ड्रोन (Armed Drone) सीधे दूतावास के परिसर से जा टकराया। इस अचानक हुए हमले (Sudden Strike) के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट (High Alert) घोषित कर दिया गया है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस ड्रोन स्ट्राइक से इमारत को कितना नुकसान (Property Damage) हुआ है या किसी की जान गई है या नहीं। हालांकि, इस घटना के बाद मध्य पूर्व (Middle East) में कूटनीतिक और सैन्य तनाव (Tension) काफी ज्यादा बढ़ गया है। इस घटना के तुरंत बाद अमेरिकी और इराकी सुरक्षा एजेंसियां (Security Agencies) अलर्ट मोड पर आ गई हैं और मामले की गहन जांच कर रही हैं।
हालांकि अभी तक किसी भी आतंकी संगठन या देश ने आधिकारिक तौर पर इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन कूटनीतिक हलकों में शुरुआती शक ईरान समर्थित गुटों (Iran-backed Militias) पर जा रहा है। बगदाद के हाई-सिक्योरिटी वाले ग्रीन ज़ोन (Green Zone) में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर अतीत में भी कई बार रॉकेट और ड्रोन से हमले किए जाते रहे हैं। इस ताज़ा हमले को क्षेत्र में अमेरिका की उपस्थिति के खिलाफ एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
घटना की सूचना मिलते ही बगदाद के अति-सुरक्षित इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। दूतावास परिसर के अंदर खतरे का सायरन (Warning Sirens) बजने की आवाजें सुनी गईं। अमेरिकी मरीन कमांडो और इराकी सुरक्षा बल मिलकर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। दूतावास के आसपास के हवाई क्षेत्र की निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी अन्य संभावित हमले को रोका जा सके।
इस सीधे हमले के बाद वाशिंगटन डीसी में भी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि अगर इस हमले में कोई बड़ा नुकसान हुआ होगा, तो अमेरिका (United States) की तरफ से इसका कड़ा और त्वरित जवाब दिया जा सकता है। यह घटना इराक की संप्रभुता और वहां मौजूद विदेशी राजनयिकों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।