Military Objectives: अमेरिका ने ईरान के खारग द्वीप पर सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया है। उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने कहा कि उनके सैन्य लक्ष्य पूरे हो गए हैं और अब ईरान के जवाब का इंतजार है।
JD Vance Statement: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है । अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वैंस ने साफ तौर पर कह दिया है कि अमेरिका ने ईरान में अपने सैन्य लक्ष्यों को काफी हद तक हासिल कर लिया है । बुडापेस्ट में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना के अभियानों ने अपने निशाने बिल्कुल सटीक लगाए हैं। अब पूरी दुनिया की निगाहें ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। वैंस ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया है कि अमेरिका ने अपनी ताकत दिखा दी है और अब गेंद ईरान के पाले में है।
उप राष्ट्रपति जेडी वैंस ने कहा कि युद्ध शुरू होने से पहले भी ईरान के साथ बातचीत बेहद मुश्किल थी और अब तो वार्ताकार बिल्कुल ही गायब हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि रात 8 बजे तक ईरान की तरफ से कोई न कोई सकारात्मक या नकारात्मक जवाब जरूर आएगा। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य यह है कि दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई बिना किसी रुकावट के चलती रहे, ताकि सर्दियां आने पर लोगों को अपने घरों को गर्म रखने में परेशानी न हो और परिवहन सुचारू रहे।
वाशिंगटन और तेहरान के बीच हालात तब बेकाबू हो गए जब अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर जोरदार हवाई हमले किए। व्हाइट हाउस द्वारा तय की गई समय सीमा खत्म होने से पहले ही अमेरिका ने ईरान के सबसे अहम 'खारग द्वीप' पर सैन्य अड्डों को अपना निशाना बनाया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, रात के अंधेरे में द्वीप के उत्तरी किनारे पर दर्जनों सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया गया।
इस बड़े ऑपरेशन की सबसे खास बात यह रही कि अमेरिका ने ईरान के तेल भंडारों या ऊर्जा ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। यह अभियान पूरी तरह से हवाई मार्ग से चलाया गया और इसमें जमीन पर कोई भी अमेरिकी सैनिक नहीं उतारा गया। इस सटीक हमले का मकसद ऊर्जा संकट पैदा करना नहीं, बल्कि ईरान की रक्षात्मक क्षमताओं को तोड़ना था। इन हमलों में ईरान के बंकर, हथियार गोदाम और वायु रक्षा प्रणालियों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है।
ईरानी सरकारी मीडिया ने भी इस बात की पुष्टि की है कि फारस की खाड़ी में स्थित खार्ग द्वीप पर बड़ा हमला हुआ है। यह छोटा सा द्वीप ईरान के लिए किसी खजाने से कम नहीं है। ईरान का लगभग 90 प्रतिशत तेल निर्यात इसी द्वीप से संभाला जाता है। ईरान की मुख्य भूमि के आसपास का पानी कम गहरा होने के कारण बड़े तेल टैंकर वहां नहीं जा सकते, इसलिए ईरान के ऊर्जा व्यापार के लिए यह द्वीप सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। इस बड़े सैन्य हमले के बाद वैश्विक शेयर बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों में उथल-पुथल मच गई है। यूरोपीय देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, जबकि मध्य पूर्व के अन्य देशों में युद्ध फैलने की आशंका से हड़कंप मचा हुआ है।
अब पूरी दुनिया की नजरें रात 8 बजे की डेडलाइन पर टिकी हुई हैं। रक्षा विशेषज्ञ यह मान रहे हैं कि ईरान की ओर से प्रतिक्रिया तय है, लेकिन वह प्रतिक्रिया सैन्य या कूटनीतिक, कैसी होगी , यह देखना बाकी है। अमेरिकी सेना और उसके सहयोगी देश किसी भी जवाबी कार्रवाई से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर हैं। अमेरिका ने रणनीतिक समझदारी दिखाते हुए तेल के बुनियादी ढांचे को जानबूझकर नहीं छुआ। यह दर्शाता है कि वाशिंगटन वैश्विक ऊर्जा बाजार में महंगाई और किल्लत नहीं लाना चाहता। सर्दियों के मौसम को देखते हुए तेल की सप्लाई बाधित होना पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता था। ( इनपुट : ANI)