
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो। (फोटो: द वाशिंगटन पोस्ट)
Airspace : ईरान के साथ जारी भीषण तनाव के बीच अमेरिका को अपने ही दोस्तों से बड़ा झटका लगा है। इटली, स्पेन और फ्रांस जैसे प्रमुख यूरोपीय देशों ने अमेरिकी वायुसेना को अपने एयरस्पेस और सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। इस फैसले से अमेरिका बुरी तरह भड़क गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इस असहयोग पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने यूरोपीय सहयोगियों को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर आपातकाल और युद्ध जैसी स्थिति में अमेरिका यूरोप में स्थित अपने ही सैन्य ठिकानों का उपयोग नहीं कर सकता, तो फिर इन एयरबेस और नाटो के इस एकतरफा सैन्य समझौते का क्या मतलब रह जाता है।
हाल ही में इटली ने अपने सिसिली स्थित महत्वपूर्ण 'सिगोनेला बेस' पर अमेरिकी लड़ाकू विमानों को उतरने से रोक दिया है। वहीं, स्पेन ने भी अपने रोता नौसेना स्टेशन और मोरोन एयरबेस के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी है। पुर्तगाल ने सिर्फ रसद के लिए एयरबेस के इस्तेमाल की छूट दी है, लेकिन किसी भी आक्रामक हमले के लिए इसका उपयोग करने से मना कर दिया है। यूरोपीय देशों का तर्क है कि वे इस युद्ध का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए वे अपनी धरती से किसी भी सैन्य हमले की अनुमति नहीं दे सकते।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि यह रवैया बेहद निराशाजनक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर नाटो का मतलब सिर्फ यह है कि अमेरिका अपनी जान जोखिम में डाल कर यूरोप को बचाएगा, लेकिन जरूरत पड़ने पर यूरोप अमेरिका को सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल से रोक देगा, तो यह व्यवस्था सही नहीं है। अमेरिका को इस गठबंधन के फायदों पर फिर से विचार करना होगा।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और उन्होंने कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप प्रशासन का हमेशा से मानना रहा है कि अमेरिका नाटो की सुरक्षा पर अरबों डॉलर खर्च करता है, लेकिन जरूरत के समय यूरोपीय देश अपनी जिम्मेदारियों से भागते हैं। आने वाले दिनों में अमेरिका यूरोपीय देशों पर दबाव बढ़ाने के लिए नाटो फंडिंग या सैन्य सुरक्षा गारंटी में कटौती जैसे कड़े फैसले ले सकता है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद ने अमेरिका और यूरोप के बीच दशकों पुराने संबंधों में बड़ी दरार डाल दी है। दरअसल, यूरोपीय देश इस समय भारी आर्थिक और ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं। उन्हें डर है कि अगर उन्होंने इस युद्ध में खुलकर अमेरिका का साथ दिया, तो ईरान उनके देशों पर सीधा हमला कर सकता है या वैश्विक तेल सप्लाई रोक सकता है, जिससे यूरोप में हाहाकार मच जाएगा।
Updated on:
07 Apr 2026 05:24 pm
Published on:
07 Apr 2026 05:11 pm
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