Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत खटाई में पड़ती नजर आ रही है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिकी विमान पहुंचने के बावजूद, ईरान ने फिलहाल किसी भी समझौते और बातचीत से साफ इनकार कर दिया है जिससे ट्रंप की टेंशन बढ़ सकती है।
US-Delegation: पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त मध्य पूर्व के बिगड़ते हालात पर टिकी हुई हैं। इसी बीच कूटनीतिक गलियारों से एक बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। सोमवार को एक महत्वपूर्ण अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचने वाला है। मीडिया रिपोटर्स के अनुसार, एक विशेष वीवीआईपी अमेरिकी विमान नूर खान एयरबेस पर उतरेगा। इस दौरे का मुख्य मकसद अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा भारी तनाव कम करना और दूसरे दौर की बातचीत किसी तरह आगे बढ़ाना है। हालांकि, मौजूदा भू-राजनीतिक हालात को देखकर यह साफ लगता है कि शांति की यह राह बहुत ही मुश्किल होने वाली है।
दरअसल, ईरान ने अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है और साफ शब्दों में कह दिया है कि वह फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत के मूड में नहीं है। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के हवाले से ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की बातचीत का अभी कोई कार्यक्रम या योजना तय नहीं है। ऐसे में इस्लामाबाद में हो रही पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों पर पानी फिरता हुआ नजर आ रहा है, जिससे ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने भी एक बड़ा दांव खेला। शांति वार्ता से ठीक पहले उन्होंने सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन मिलाया। मुनीर ने ट्रंप को स्पष्ट रूप से बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में अमेरिका द्वारा की गई नाकेबंदी के कारण ईरान खासा नाराज है। मुनीर के मुताबिक, यही नाकेबंदी बातचीत की राह में सबसे बड़ी अड़चन बन रही है। ट्रंप ने भी इस गंभीर मुद्दे पर विचार करने का भरोसा दिया है, लेकिन ईरान की तरफ से अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया है।
वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पूरी तरह आश्वस्त और सकारात्मक नजर आ रहे हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान दावा किया कि उनके विशेष दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ पश्चिम एशिया के महत्वपूर्ण दौरे पर जा रहे हैं और मंगलवार को उनकी अहम बैठकें शुरू होंगी। ट्रंप का मानना है कि यह एक बहुत ही सरल समझौता है और ज्यादातर बिंदुओं पर दोनों पक्ष पहले ही सहमत हो चुके हैं। आपको बता दें कि आठ अप्रैल को दोनों देशों के बीच दो हफ्ते के लिए जो अस्थायी युद्धविराम हुआ था, उसकी समय सीमा 22 अप्रेल को खत्म होने जा रही है।
पहले दौर की चर्चाओं में भी कई पेचीदा मसले बिना सुलझे रह गए थे। ईरान शुरुआत से ही यूरेनियम संवर्धन और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील मामलों पर अपनी कड़ी शर्तों पर अड़ा हुआ है। अब देखना यह बेहद दिलचस्प होगा कि इस्लामाबाद में चल रही यह कूटनीतिक हलचल क्या नया रंग लाती है, या फिर 22 अप्रेल के बाद मध्य पूर्व में तनाव का एक नया और खतरनाक दौर शुरू हो जाएगा।
वैश्विक कूटनीतिक जानकारों और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह अड़ियल रुख अमेरिका के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका है। युद्धविराम की मियाद खत्म होने से पहले अगर बातचीत तुरंत पटरी पर नहीं लौटी, तो पूरे पश्चिम एशिया में हालात बेकाबू हो सकते हैं और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
इस पूरे मामले में अगले 48 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं। अमेरिकी दूतों जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ की पश्चिम एशिया यात्रा तथा मंगलवार सुबह होने वाली उच्च स्तरीय बैठकों पर लगातार दुनिया की नजर बनी रहेगी। ईरान के अगले कदम और ट्रंप प्रशासन के नए फैसलों का सभी को इंतजार रहेगा।
इस पूरे अंतरराष्ट्रीय विवाद में पाकिस्तान खुद को एक अहम शांति दूत के तौर पर स्थापित करने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर का सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को फोन करना यह दर्शाता है कि पाकिस्तान इस क्षेत्र में अपनी गिरती हुई भू-राजनीतिक अहमियत को दोबारा भुनाना चाहता है और खुद को एक अहम खिलाड़ी के रूप में पेश कर रहा है।