World War 3: अमेरिका ने ईरान को उसके मिसाइल लॉन्चर और हथियार फैक्ट्रियां नेस्तनाबूद करने की खुली धमकी दी है। पलटवार करते हुए ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा, जिससे मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा गहरा गया है।
Middle East Crisis: दुनिया एक बार फिर बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ी हुई नजर आ रही है। मध्य पूर्व में तनाव (Middle East Crisis) अपने चरम पर पहुंच गया है और अब अमेरिका और ईरान सीधे तौर पर आमने-सामने आ गए हैं। अमेरिका ने ईरान (US Iran Conflict)को खुली और बहुत सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने अपनी आक्रामक गतिविधियां तुरंत बंद नहीं कीं, तो अमेरिकी सेना ईरान के मिसाइल लॉन्चरों और हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों (Iran Missile Factory) को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर देगी। इस बड़ी धमकी के जवाब में ईरान ने भी कड़े तेवर दिखाए हैं। ईरानी नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी बाहरी दबाव के आगे घुटने नहीं टेकेगा और उसके पीछे हटने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।
जानकारी के अनुसार यह टकराव तब और गहरा गया जब अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने ईरान समर्थित गुटों की ओर से क्षेत्र में किए जा रहे लगातार हमलों पर कड़ी आपत्ति जताई। अमेरिकी प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि मध्य पूर्व में अशांति फैलाने वाले इन हमलों के पीछे सीधे तौर पर ईरान की फंडिंग और उनके ही हथियार इस्तेमाल हो रहे हैं। अमेरिका की नई रणनीति अब सीधे उन ठिकानों पर स्ट्राइक करने की है, जहां से ये घातक मिसाइलें तैयार होकर लॉन्च की जाती हैं।
दूसरी तरफ ईरानी सैन्य कमांडरों ने इस अमेरिकी बयान को 'कोरी गीदड़ भभकी' करार दिया है। ईरान का कहना है कि उनकी सेना अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है। अगर अमेरिका ने किसी भी ईरानी सैन्य ठिकाने पर हमला करने की भूल की, तो इसका अंजाम बेहद भयानक होगा।
इस सीधे टकराव के बाद पूरी दुनिया में खलबली मच गई है। खाड़ी देशों में दहशत का माहौल है कि अगर ये दोनों ताकतें सीधे तौर पर भिड़ती हैं, तो पूरा मध्य पूर्व युद्ध की आग में झुलस जाएगा। यूरोपीय देशों ने दोनों पक्षों से तुरंत संयम बरतने की अपील की है। रूस और चीन जैसे देशों ने अमेरिकी सैन्य धमकी की आलोचना करते हुए कूटनीति के जरिए मसला सुलझाने पर जोर दिया है। इस तनाव की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में घबराहट फैल गई है और कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में अचानक भारी उछाल देखा गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति के कड़े रुख के तुरंत बाद, पेंटागन ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इलाके में अतिरिक्त लड़ाकू विमान, ड्रोन और युद्धपोत तैनात किए जा रहे हैं। इसके जवाब में, ईरान ने भी अपनी वायु रक्षा प्रणाली (एयर डिफेंस सिस्टम) को 'हाई अलर्ट' पर डाल दिया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अपने सीक्रेट भूमिगत मिसाइल बेस को भी युद्ध की स्थिति के लिए सक्रिय कर दिया है। जानकारों का मानना है कि आने वाले 48 से 72 घंटे इस क्षेत्र की शांति के लिए बेहद निर्णायक साबित होंगे।
बहरहाल, इस वैश्विक विवाद का एक बहुत बड़ा पहलू अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भारत जैसे देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला सीधा असर है। अगर लाल सागर और फारस की खाड़ी में युद्ध छिड़ता है, तो दुनिया की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित होगी। मालवाहक जहाजों के रास्ते बंद होने से महंगाई बेकाबू हो सकती है। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों से आने वाले तेल पर निर्भर है, उसे इस भू-राजनीतिक तनाव के कारण बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है।