
US Economic Measures Against Iran: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब सिर्फ सैन्य टकराव तक सीमित नहीं दिख रहा है। वॉशिंगटन ने आर्थिक दबाव को ऐसे स्तर तक ले जाने के संकेत दिए हैं, जिसकी मिसाल पहले नहीं देखी गई। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अगले सप्ताह ईरान के खिलाफ बेहद कठोर कदमों की घोषणा हो सकती है। इसके साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी जारी रखने की बात ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि वॉशिंगटन अगले सप्ताह ईरान को लेकर और घोषणाएं कर सकता है। Newsmax को दिए इंटरव्यू में उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका ऐसे आर्थिक उपाय लागू करने जा रहा है, जिन्हें किसी देश को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के इतिहास में अभूतपूर्व बताया जा रहा है।
बेसेंट के मुताबिक, अमेरिकी रणनीति सिर्फ वित्तीय प्रतिबंधों तक सीमित नहीं होगी। इसमें ईरानी बंदरगाहों तक सामान और व्यापारिक गतिविधियों को रोकने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जारी अमेरिकी नाकेबंदी भी शामिल रहेगी। यानी वॉशिंगटन आर्थिक मोर्चे के साथ समुद्री दबाव को भी एक साथ इस्तेमाल करने की तैयारी में है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि वॉशिंगटन की प्राथमिकताओं में अमेरिकी ऊर्जा कीमतों को स्थिर करना, ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना और संघर्ष से अमेरिका को रणनीतिक रूप से मजबूत स्थिति में निकालना शामिल है।
इससे साफ है कि अमेरिका के लिए यह टकराव केवल ईरान पर दबाव बनाने का मामला नहीं है। ऊर्जा बाजार, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन तीनों मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस पूरे संकट का सबसे संवेदनशील केंद्र बन गया है। यह खाड़ी क्षेत्र से वैश्विक बाजारों तक तेल और गैस की आवाजाही के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। मौजूदा संकट में यहां जहाजों की आवाजाही सामान्य स्तर से काफी नीचे आ गई है।
अमेरिका का कहना है कि वह समुद्री नाकेबंदी को लंबे समय तक जारी रख सकता है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि अमेरिकी नौसेना इस अभियान को अनिश्चित अवधि तक बनाए रखने में सक्षम है।
स्कॉट बेसेंट का बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने नए कदमों की घोषणा के लिए अगले सप्ताह की ओर इशारा किया है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित आर्थिक उपायों का दायरा कितना व्यापक होगा, लेकिन अमेरिकी प्रशासन के बयानों से संकेत मिल रहा है कि ईरान पर वित्तीय और व्यापारिक दबाव और बढ़ सकता है।
अगर इसके साथ होर्मुज में समुद्री टकराव जारी रहता है और बाब-अल-मंदेब में भी हमले बढ़ते हैं, तो मामला सिर्फ अमेरिका-ईरान संघर्ष नहीं रहेगा। इसका असर खाड़ी देशों, वैश्विक तेल बाजार, समुद्री बीमा, एशियाई ऊर्जा आयात और अंतरराष्ट्रीय व्यापार तक पहुंच सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है अमेरिका अगले सप्ताह आखिर कौन-सा ऐसा कदम उठाएगा, जिसे उसके वित्त मंत्री इतिहास में अभूतपूर्व आर्थिक अलगाव की कार्रवाई बता रहे हैं?