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अमेरिका-ईरान युद्ध में नया मोड़! IMF ने दुनिया भर के देशों की दी इस बात की चेतावनी

Iran War IMF Update: इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड के हेड ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध से दुनिया भर में एक बड़ा आर्थिक झटका लगा है… नीचे पढ़ें पूरी अपडेट।

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Apr 12, 2026
IMF की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा (सोर्स: ANI)

IMF Latest Update: अमेरिका-ईरान युद्ध ने आर्थिक मोर्चे पर भी दुनिया भर के देशों की टेंशन बढ़ा दी है। IMF ने चेतावनी दी है कि इस संघर्ष का असर हर देश की जेब पर पड़ने वाला है। IMF की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा के मुताबिक, तेल और गैस की सप्लाई में आई भारी रुकावट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका दिया है।

पिछले कुछ हफ्तों से दुनिया का बड़ा हिस्सा ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है, जिससे कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इसका असर सबसे ज्यादा उन देशों पर पड़ रहा है जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं या जिनके पास सीमित संसाधन हैं। आम लोगों के लिए इसका मतलब है महंगाई, महंगा ईंधन और बढ़ती लागत। सवाल अब ये है कि यह संकट कितने समय तक दुनिया को प्रभावित करेगा।

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IMF हेड की चेतावनी

'CBS' न्यूज के फेस द नेशन के साथ एक इंटरव्यू में जॉर्जीवा ने कहा, “मैं आपको बता सकती हूं कि यह झटका बहुत बड़ा है। दुनिया में बहने वाला 13 परसेंट तेल, 20% गैस अब पांच हफ्तों से फंसा हुआ है और गिनती जारी है, यह झटका पहले से ही सभी सेक्टर्स में फैल रहा है, जिससे फ्यूल की उपलब्धता, फर्टिलाइजर सप्लाई, ट्रांसपोर्टेशन और रेमिटेंस पर असर पड़ रहा है। लोग परेशान हैं। वे सिर्फ क्वांटिटी की कमी की वजह से परेशान हैं। अगर युद्ध (सीजफायर) पर कार्य नहीं हुआ तो इसके अच्छे परिणाम नहीं निकलेंगे।"

उन्होंने आगे कहा कि एनर्जी से जुड़ी कई अहम सुविधाओं को ठीक होने में काफी समय लग सकता है। खासकर खराब गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से पूरी क्षमता पर लाने में करीब 3 से 5 साल लग सकते हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका पर इसका असर बाकी देशों की तुलना में कम है, लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई को काबू में लाने की कोशिशें धीमी पड़ सकती हैं।

उन्होंने समझाया कि महंगाई का असर हर व्यक्ति पर पड़ता है और यह आम लोगों, खासकर कम कमाई वाले परिवारों के लिए किसी “टैक्स” जैसा महसूस होता है।

IMF को उम्मीद थी कि 2026 में दुनिया की अर्थव्यवस्था बेहतर होगी, लेकिन अब इस युद्ध की वजह से ग्रोथ घट सकती है। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि संघर्ष कितने समय तक चलता है और उत्पादन कितनी जल्दी सामान्य होता है।

उन्होंने सरकारों को सलाह दी कि वे सोच-समझकर फैसले लें, ईंधन पर व्यापारिक पाबंदियों से बचें और गरीब व कमजोर लोगों को सीधे मदद दें। साथ ही कहा कि इस संकट के कारण भविष्य में एनर्जी के नए विकल्पों और बचत पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा, लेकिन फिलहाल लोगों और कारोबारों को नुकसान झेलना पड़ेगा।

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