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US Iran War News: ईरान की जंग में साथ नहीं दिया तो भड़के ट्रंप, दक्षिण कोरिया से पूछा- 39 हजार सैनिक तुम्हारी रक्षा कर रहे हैं, फिर मदद क्यों नहीं?

US South Korea Alliance: अमेरिका-दक्षिण कोरिया गठबंधन में ईरान युद्ध को लेकर नई दरार के संकेत मिले हैं। ट्रंप ने सियोल की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सैन्य खर्च और उत्तर कोरिया से सुरक्षा की अमेरिकी जिम्मेदारी का मुद्दा फिर सामने ला दिया है।
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Aug 18, 2026
Donald Trump South Korea Iran War:
Donald Trump South Korea Iran War: ईरान संघर्ष में मदद से दक्षिण कोरिया का इनकार, ट्रंप ने अमेरिका के रक्षा खर्च पर उठाए सवाल (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Donald Trump South Korea Iran War: ईरान को लेकर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई अब केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं दिख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ अपने सुरक्षा रिश्ते को ईरान संघर्ष से जोड़कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। ट्रंप के मुताबिक उन्होंने राष्ट्रपति ली जे-म्यॉन्ग से ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान में सहयोग मांगा, लेकिन सियोल ने इससे दूरी बनाए रखी। इसके बाद ट्रंप ने दक्षिण कोरिया की सुरक्षा पर अमेरिका के खर्च और वहां तैनात अमेरिकी सैनिकों का हवाला देकर तीखे सवाल उठाए।

US Iran War News: ट्रंप का सवाल- अमेरिका दक्षिण कोरिया की रक्षा क्यों करे?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्यॉन्ग से बातचीत के दौरान ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान में थोड़ी मदद देने की बात कही थी। ट्रंप के अनुसार, उन्होंने साफ किया कि अमेरिका को किसी सहायता की जरूरत नहीं है, लेकिन यदि दक्षिण कोरिया चाहे तो सहयोग कर सकता है।

ट्रंप का दावा है कि सियोल ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद उन्होंने सीधे दक्षिण कोरिया की सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए सवाल खड़ा किया कि जब अमेरिका वहां बड़ी सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है और उत्तर कोरिया से सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहा है, तो ईरान के मामले में सहयोग से इनकार क्यों किया जा रहा है।

'हमारे सैनिक तुम्हारी रक्षा कर रहे हैं'

ट्रंप ने बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और वे उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के नेतृत्व वाले शासन से दक्षिण कोरिया की सुरक्षा में भूमिका निभाते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने अमेरिका द्वारा सहयोगी देशों की रक्षा पर होने वाले खर्च को लेकर अपनी पुरानी नाराजगी दोहराई।

हालांकि यहां एक अहम तथ्य ध्यान देने लायक है। अमेरिकी कांग्रेस के रिसर्च सर्विस के अनुसार दक्षिण कोरिया में करीब 28,500 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ट्रंप ने हाल के बयानों में इससे ज्यादा संख्या का उल्लेख किया है। अप्रैल 2026 में भी उनके सैनिकों की संख्या संबंधी दावे की तथ्य-जांच हुई थी और आधिकारिक आंकड़ों में करीब 28,500 सैनिकों की मौजूदगी बताई गई थी।

दक्षिण कोरिया के लिए ईरान में उतरना आसान फैसला नहीं

दक्षिण कोरिया का ईरान संघर्ष से दूरी बनाए रखना केवल अमेरिका को जवाब देने का मामला नहीं है। सियोल की अपनी रणनीतिक मजबूरियां भी हैं। दक्षिण कोरिया की सुरक्षा नीति का सबसे बड़ा केंद्र अब भी उत्तर कोरिया है, जिसके पास परमाणु और मिसाइल क्षमताएं हैं।

अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई सेनाओं का गठबंधन मुख्य रूप से कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा और उत्तर कोरियाई खतरे को रोकने पर केंद्रित रहा है। 1953 में हुए पारस्परिक रक्षा समझौते के बाद दोनों देशों का सैन्य गठबंधन लगातार मजबूत हुआ है।

ऐसे में सियोल के लिए पश्चिम एशिया के संघर्ष में सीधे सैन्य भूमिका लेना रणनीतिक जोखिम बढ़ा सकता है। खासकर तब, जब उत्तर कोरिया लगातार अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है।

ट्रंप ने सैन्य अभ्यास पर भी दिखाई नाराजगी

ईरान विवाद के बीच ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने पेंटागन को इन अभ्यासों में बड़ी कटौती करने का निर्देश दिया है। इसके पीछे उन्होंने भारी खर्च और उत्तर कोरिया के साथ अपने रिश्तों को भी वजह बताया।

इसी दौरान अमेरिका और दक्षिण कोरिया का वार्षिक उल्ची फ्रीडम शील्ड अभ्यास निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शुरू हुआ। इसमें करीब 18,000 दक्षिण कोरियाई सैनिकों की भागीदारी बताई गई है। अभ्यास में ड्रोन, साइबर हमले, जीपीएस बाधित होने जैसी आधुनिक युद्ध परिस्थितियों से निपटने की तैयारी पर भी जोर है।

किम जोंग उन के साथ ट्रंप की दोस्ती बनी नया सवाल

ट्रंप का दक्षिण कोरिया के प्रति ताजा रुख इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ संवाद के पक्ष में लगातार संकेत देते रहे हैं। वहीं अमेरिकी-साउथ कोरियाई सैन्य अभ्यास को लेकर उनका रुख सख्त हुआ है।

विशेषज्ञों की चिंता यह है कि यदि अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच सैन्य सहयोग कमजोर होता है, तो इसका असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। इससे उत्तर कोरिया को अपनी सैन्य रणनीति को आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाने का मौका मिल सकता है। कुछ विश्लेषकों ने अमेरिकी सुरक्षा गारंटी की विश्वसनीयता को लेकर दक्षिण कोरिया में नई बहस शुरू होने की आशंका जताई है।

क्या अमेरिका-दक्षिण कोरिया रिश्ते में बड़ा बदलाव आने वाला है?

फिलहाल इसे गठबंधन के टूटने की स्थिति कहना जल्दबाजी होगी। अमेरिका और दक्षिण कोरिया का सैन्य रिश्ता सात दशक से ज्यादा पुराना है और दोनों देशों के बीच व्यापक रक्षा सहयोग मौजूद है। दक्षिण कोरिया खुद भी अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने पर जोर देता रहा है।

लेकिन ट्रंप का ताजा रुख यह जरूर दिखाता है कि अमेरिकी प्रशासन सहयोगी देशों से ज्यादा प्रत्यक्ष योगदान और राजनीतिक समर्थन की अपेक्षा कर रहा है। ईरान युद्ध ने इस पुराने सवाल को फिर सामने ला दिया है कि अमेरिका अपने सहयोगियों की रक्षा के बदले उनसे कितना समर्थन चाहता है।

Updated on:
18 Aug 2026 07:45 am
Published on:
18 Aug 2026 07:27 am