ईरान युद्ध में अमेरिका को बड़ी कामयाबी मिली है। पेंटागन ने बताया कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में ईरान के 13,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए गए।
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच हुए युद्ध में अमेरिकी सेना को बड़ी कामयाबी मिली है। पेंटागन ने बताया कि 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत अमेरिका ने ईरान के 13,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए।
इसमें ईरान की हवा, समुद्र और जमीन पर तैनात भारी संख्या में सैन्य ताकत लगभग खत्म हो गई है। लेकिन अमेरिका को इस बड़ी कामयाबी की कीमत भी चुकानी पड़ी।
इस अभियान में 13 अमेरिकी सैनिक शहीद हो गए। जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन एयर फोर्स जनरल डैन केन ने कहा कि युद्ध का ये दौर बहुत खूंखार और अनिश्चित था।
पेंटागन के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान की एयर डिफेंस सिस्टम का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा नष्ट कर दिया। 450 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल स्टोरेज, 800 से ज्यादा ड्रोन ठिकाने और 1,500 एयर डिफेंस टारगेट्स तबाह किए गए।
समुद्र में भी ईरान को भारी नुकसान हुआ। उसकी नौसेना का 90 प्रतिशत बेड़ा डुबो दिया गया या क्षतिग्रस्त कर दिया गया। 700 से ज्यादा हमलों में ईरान के समुद्री खदानें भी लगभग खत्म हो गईं।
युद्ध में ईरान की हथियार फैक्टरियों का 90 प्रतिशत हिस्सा भी निशाना बना। खास बात ये कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े औद्योगिक ठिकानों का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ। कमांड और कंट्रोल नेटवर्क भी बुरी तरह बिखर गया।
जनरल डैन केन ने बताया कि पूरे अभियान में 10,000 से ज्यादा मिशन पूरे किए गए। इसमें 62 बॉम्बर सॉर्टीज शामिल थीं, जिनमें कुछ 30 घंटे से ज्यादा लंबी उड़ानें थीं।
उन्होंने बताया कि अमेरिका ने 50,000 से ज्यादा सैनिकों को इस इलाके में तैनात किया। उन्होंने गर्व से कहा कि दुनिया की कोई और सेना इतनी दूर जाकर, इतने लंबे समय तक और इतनी बड़ी संख्या में हमले नहीं कर सकती।
जनरल केन ने शहीद हुए 13 सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि युद्ध कितना भी सफल हो, लेकिन सैनिकों की जान की कीमत कभी नहीं भुलाई जा सकती।
उनके परिवारों के दर्द को समझते हुए उन्होंने कहा कि ये लड़ाई आसान नहीं थी, गर्मी, अंधेरा, अनिश्चितता और दुश्मन का हमला हर पल मौजूद था।
अब अमेरिका का कहना है कि ईरान की क्षेत्रीय ताकत काफी कमजोर हो गई है और वो अब आसानी से अमेरिकी हितों को नुकसान नहीं पहुंचा सकता।