US-Israel-Iran War: इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का आज नौंवा दिन है। इजरायल ने ईरान को कमजोर करने के लिए उसके तेल भंडारों पर हमला शुरू कर दिया है। इसी के तहत ईरान के तीन तेल टैंकों और कई तेल डीपो पर हमला किया गया है।
US-Israel-Iran War: इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुई लड़ाई अब एक युद्ध में बदल गई है। इस जंग का आज नौवां दिन है और इसके चलते अब तक सैंकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और अरबों रुपये का नुकसान हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद यह लड़ाई खत्म होने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे है। इसी बीच अब खबर सामने आ रही है कि इजरायल ने ईरान के तेल भंडारों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इजरायल ने ईरान के 30 से फ्यूल टैंकों और कई तेल डिपो पर बम गिराए है।
इजरायली सेना ने ईरान की राजधानी तेहरान और पास के शहर करज में कई फ्यूल स्टोरेज साइट्स को निशाना बनाया। इस हमले के बाद कई जगह जोरदार विस्फोट और आग लगने की खबर सामने आई। ईरान के ऑयल मंत्रालय ने पुष्टि की कि तेहरान और अलबोर्ज प्रांत के कई ऑयल डिपो इस एयर स्ट्राइक में प्रभावित हुए हैं। इसके कई वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है। इन वीडियो में सड़कों पर चारों तक आग फैली हुई नजर आ रही है और पूरे इलाके में धुंआ फैला हुआ है।
इजरायली सेना ने दावा किया कि उसने तेहरान में स्थित कई फ्यूल स्टोरेज और एनर्जी फैसिलिटी को निशाना बनाया। सेना का कहना है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल ईरान की सशस्त्र सेनाएं सैन्य गतिविधियों के लिए कर रही थीं। हमले के बाद तेहरान और करज में बड़े विस्फोट हुए और कई जगहों पर आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए इमरजेंसी टीमों को तुरंत भेजा गया। ईरान के ऑयल मंत्रालय ने कहा कि हमले से कुछ तेल भंडारण केंद्रों को नुकसान पहुंचा है, लेकिन स्थिति पर काबू पाने की कोशिश जारी है। इस हमले ने वेस्ट एशिया में पहले से मौजूद तनाव को और ज्यादा बढ़ा दिया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कशम द्वीप पर स्थित एक डिसैलिनेशन प्लांट पर हमला किया गया, जिससे लगभग 30 गांवों की पानी आपूर्ति प्रभावित हुई है। यह प्लांट समुद्री पानी से नमक हटाकर पीने का पानी तैयार करता है और खाड़ी क्षेत्र में ऐसे प्लांट पानी की आपूर्ति का मुख्य स्रोत माने जाते हैं। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला बेहद खतरनाक कदम है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उनके अनुसार यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा की गई है।